मोदी सरकार के राज में भारत में सरकारी कंपनियों का निजीकरण जोरों शोरों से किया जा रहा है। जिसका विपक्षी दलों द्वारा विरोध भी किया गया है। लेकिन मोदी सरकार ने यह ठान ली है कि वह देश की सरकारी संस्थाओं को खत्म करके ही दम लेगी।

इसी बीच वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार 6 सरकारी कंपनियों को बंद करने जा रही है। खबर के मुताबिक, 6 CPSE को बंद करने और मुकदमेबाजी पर विचार किया जा रहा है। बाकी 20 कंपनियों से निवेश वापिस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

बताया जा रहा है कि जिन CPSEs की रणनीतिक बिक्री प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनमें HPCL, REC, हॉस्पिटल सर्विसेज कंसल्टेंसी, नेशनल प्रॉजेक्ट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन, ड्रेजिंग कॉरपोरेशन, THDC इंडिया लिमिटेड, नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO) और कामाराजर पोर्ट शामिल हैं।

आपको बता दें कि लोकसभा में एक लिखित उत्तर में राज्य वित्त मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि इन कंपनियों में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है।

इसके साथ ही अनुराग ठाकुर ने ये भी बताया है कि नीति आयोग ने सरकारी कंपनियों के विनिवेश के लिए कुछ शर्तें तय की हैं। इसके आधार पर सरकार ने 2016 से 34 कंपनियों में रणनीतिक विनिवेश को मंजूरी दी है।

कांग्रेस ने इस मामले में मोदी सरकार को घेरते हुए कहा है कि भाजपा सालों से स्थापित सरकारी संस्थानों को बेचकर देश को बर्बाद कर रही है।

रेलवे के बाद बिजली विभाग, आयल कार्पोरशनों एवं कोल माइन्स, दूरसंचार निगम, रोडवेज और सरकारी अस्पताल का भी निजीकरण कर भाजपा पूरे देश को पूंजीपतियों के हाथों में गिरवी रखने का खेल रच रही है।

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