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लोकसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी की साख ख़तरे में नज़र आने लगी है। BJP के कई सांसद और विधायक पार्टी से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। इसी फेहरिस्त में अब बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले का नाम जुड़ गया है। उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है।

दलित समाज से आने वाली फुले ने अपने इस्तीफे का ऐलान लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया। फुले कई मुद्दों को लेकर BJP से नाराज़ चल रहीं थीं।

उन्होंने इस्तीफा देने के साथ ही बीजेपी पर एक बार फिर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP समाज में बंटवारे की साजिश कर रही है। इस दौरान उन्होंने यह भी साफ किया कि वह अब कभी बीजेपी में वापस नहीं लौटेंगी और अपने कार्यकाल तक वह सांसद बनी रहेंगी।

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इस दौरान फुले ने BJP और आरएसएस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी दलितों के विरोध में है। बाबा साहेब की प्रतिमा पूरे देश में कई जगह तोड़ी गई लेकिन तोड़नेवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बार-बार बीजेपी के बड़े नेता संविधान बदलने की बात कहते हैं लेकिन आज तक प्राइवेट सेक्टर में एससी-एसटी के लिए आरक्षण लागू करने का वादा नहीं निभाया गया।

केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए सांसद ने कहा कि काला धन विदेश से वापस लाने का वादा भी पूरा नही किया गया। मंदिर-मस्जिद का खौफ दिखाकर आपसी भाईचारा खत्म किया जा रहा है। फुले ने आरोप लगाया कि दलित सांसद होने की वजह से उनकी कभी बात नहीं सुनी गई और हमेशा उपेक्षा की गई।

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ग़ौरतलब है कि हाल के दिनों में बीजेपी के कई कद्दावर नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। इनमें पूर्व राज्यसभा सांसद चंदन मित्रा से लेकर राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सुरेंद्र गोयल और महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता एवं धुले विधानसभा सीट से विधायक अनिल गोटे और कटोल विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक आशीष देशमुख का नाम शामिल है।

बीजेपी नेताओं का इस तरह पार्टी छोड़कर जाना पार्टी की साख़ पर भी सवाल खड़े करता है। 2019 में लोकसभा के लिए चुनाव होने हैं और बीजेपी नेताओं के पलायन का सिलसिला जारी है। इस पलायन को मोदी लहर के ख़ात्मे के तौर पर भी देखा जा रहा है।