बीते कुछ समय से त्रिपुरा में हुई हिंसा के लिए भाजपा सरकार की देशभर में कड़ी निंदा की गई। जल्द ही त्रिपुरा में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं।

त्रिपुरा हिंसा मामले में तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

दूसरी तरफ से भारतीय जनता पार्टी के नेता सुदीप राय बर्मन ने स्थानीय निकाय चुनाव से 2 दिन पहले ऐसा बयान दे दिया है। जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

उन्होंने कहा है कि त्रिपुरा में कोई कानून व्यवस्था नहीं है। राज्य की पुलिस भी लोगों के जान-माल की रक्षा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

इसके साथ ही उन्होंने त्रिपुरा में चल रही गुंडागर्दी के खिलाफ अघोषित लड़ाई में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अपील भी की है।

इसके साथ ही भाजपा विधायक प्रदीप राय बर्मन ने यह भी कहा है कि राज्य में होने वाले चुनाव बचकाना नेता के चलते अब नकारात्मकता से भरे युद्ध के मैदान में तब्दील हो गए हैं।

जिससे भारतीय जनता पार्टी और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों की ही काफी बदनामी हो रही है।

मुख्यमंत्री बिप्लब देब का नाम लिए बिना उन्होंने उन पर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेताओं के सामने वह सिर्फ अपनी लोकप्रियता साबित करने में लगे हुए हैं।

हमारे राज्य की संस्कृति और विरासत को बर्बाद किया जा रहा है। राजनीतिक फायदे के लिए लोगों को लड़वाया जा रहा है। मुख्यमंत्री बिप्लब देब के अब दिन गिने-चुने रह गए हैं।

इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के एक अन्य विधायक आशीष साहा ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब देब का नाम लिए बिना उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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