मोदी सरकार के शासनकाल में एक और बैंक डूबने के कगार पर पहुंच चुका है। आर्थिक संकट से जूझ रहे इस बैंक की स्थिति हर दिन बिगड़ती जा रही है। हाल ही में इस बैंक को मोदी सरकार द्वारा एक महीने के लिए मोरटोरियम पर डाला गया था। यह बैंक है लक्ष्मी विलास बैंक।

इसी बीच खबर सामने आ रही है कि लक्ष्मी विलास बैंक का विलय डीबीएस इंडिया के साथ हो सकता है।

लक्ष्मी विलास बैंक के डूबने की खबर के बाद बैंक के ग्राहक चिंता में डूबे हुए हैं। ग्राहकों को अपना पैसा डूब जाने की चिंता सता रही है।

इसके साथ ही लक्ष्मी विलास बैंक के डीबीएस इंडिया बैंक के साथ विलय की खबर सामने आने के बाद से स्टॉक मार्केट में लक्ष्मी विलास बैंक के शेयर गिर गए हैं।

माना जा रहा है कि लक्ष्मी विलास बैंक का पतन इस वजह से शुरू हुआ। क्यूंकि बैंक ने अपनी आर्थिक हैसियत से ज्यादा के कॉर्पोरेट लोन बांटे थे।

दरअसल कई सरकारी और प्राइवेट बैंक तेजी से ग्रोथ करने के लिए कॉरपोरेट लोन का रुख करते हैं। जिसमें की रिस्क की मात्रा भी ज्यादा रहती है।

इस मामले में विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा है कि “भाजपा के भ्रष्टाचारी राज में बैंकों का डूबना जारी है. अब जनता की बचत लक्ष्मी विलास बैंक में डूब रही है.

उप्र के लाखों खाताधारकों का पैसा प्रादेशिक व अन्य राज्यों की शाखाओं में फँस गया है. भाजपा ने सबके ख़िलाफ़ जाकर, सबका विनाश कर, सबका विश्वास खो दिया है. #नहीं_चाहिए_भाजपा।”

इससे पहले मोदी सरकार के राज में भी कई छोटे बड़े बैंकों पर मंडरा रहे खतरे के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा था।

राहुल गाँधी ने कहा था है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश के कई बैंक खतरे में हैं।

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