पिछले साल जब GDP 7 फीसदी पर पहुंची थी, तो केंद्र की मोदी सरकार ने इसे अपनी सबसे बड़ी उप्लब्धि के तौर पर प्रचारित किया था। लेकिन इस साल जीडीपी में लगातार आ रही गिरावट के बाद सरकार इसकी ज़िम्मेदारी लेने से बचती नज़र आ रही है।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने तो अब ये तक कह दिया है कि जीडीपी का कोई महत्व ही नहीं है। उन्होंने लोकसभा में कहा, “जीडीपी 1934 में आया, इससे पहले कोई जीडीपी नहीं था। केवल जीडीपी को बाइबल, रामायण या महाभारत मान लेना सत्य नहीं है और भविष्य में जीडीपी का कोई बहुत ज़्यादा उपयोग भी नहीं होगा”।

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बीजेपी सांसद के जीडीपी को बोगस बताने पर पत्रकार अजीत अंजुम ने तंज करते हुए ट्विटर पर लिखा- अब इन्हें भी वित्त मंत्री बनाया जाए . देश को अब ऐसे ‘अर्थशास्त्री’ ही दिशा दे सकते हैं. ये जीडीपी -वीडीपी क्या है.. बेकार में आप लोग हलकान हुए जा रहे हैं..

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बीजेपी सांसद का ये बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब केंद्र की मोदी सरकार गिरती जीडीपी को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी गिरकर 4.5 फीसदी पर पहंच गई है। साल की पहली तिमाही में ये 5 फीसदी पर थी।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियों की वजह से जीडीपी में लगातार गिरावट आ रही है। विपक्ष कहता रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी से देश उबर नहीं पाया है, जिसके चलते देश आर्थिक मंदी की तरफ़ जा रहा है।

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हालांकि सरकार का दावा है कि देश में आर्थिक सुस्ती ज़रूर है, लेकिन मंदी जैसे हालात नहीं है। लेकिन जीडीपी के ताज़ा आए इन आंकड़ों ने सरकार के इन दावों की पोल खोल दी है। जिसके बाद बीजेपी नेता अब जीडीपी के आंकड़ों को ही गैरज़रूरी बताने में जुट गए हैं।

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