हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी नई पार्टी जनता जननायक पार्टी यानी जेजेपी। मनोहर लाल खट्टर ने बीजेपी की साख बचाई और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस की मजबूत दावेदारी दिखाई लेकिन इन सबके बावजूद सबसे ज्यादा चर्चा हुई दुष्यंत चौटाला की।

क्योंकि इस चुनाव में बेहतरीन और करिश्माई प्रदर्शन से सभी को हैरान करने वाले दुष्यंत चौटाला किंग मेकर बने।
जिन्हें स्थापित पार्टियों ने कोई असरदार फैक्टर मानने से इनकार किया था उन्होंने नतीजों के बाद राज्य के सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली।

चाबी निशान वाली जनता जननायक पार्टी ने अपना पहला चुनाव लड़ा था और पहले ही चुनाव में इस तरह के करिश्माई प्रदर्शन के बाद सवाल उठता है कि 11 महीने की एक नई पार्टी ने ऐसी कौन सी नीति अपनाई कि भाजपा और कांग्रेस जैसे स्थापित पार्टियों का प्रदर्शन भी फीका लगने लगा।

इसके पीछे कई फैक्टर हो सकते हैं लेकिन चुनाव प्रचार की स्ट्रेटजी देखने पर डिजिटल कैंपेन बेहद प्रभावित करता है। दुष्यंत चौटाला का फेसबुक पेज देखा जाए तो किसानों नौजवानों और महिलाओं को प्रभावित करने वाले अलग-अलग मुद्दों पर केंद्रित वीडियो कैंपेन दिखाई देते हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान दुष्यंत चौटाला एक दिन में कई बार फेसबुक लाइव पर दिखाई देते हैं यहां तक कि अक्सर शाम में अपने तमाम कार्यकर्ताओं और समर्थकों से संवाद करते नजर आते हैं।

ये सब देखकर पड़ताल करने पर पता चलता है कि इतनी सधी हुई रणनीति के पीछे चुनाव-नीति नाम की संस्था काम कर रही थी।

हरियाणा में जेजेपी के डिजिटल प्रचार तंत्र के पीछे जो शख्स नीतिगत तरीके से काम कर रहे थे उनका नाम है गजेंद्र शर्मा। गजेंद्र राजनीतिक दलों के चुनावी कैंपेन करते हैं।

जेजेपी का कैंपेन संभालने के पहले उन्होंने आम आदमी पार्टी के दिल्ली और पंजाब के चुनावी कैंपेन में अहम भूमिका निभाई थी।

वो कहते हैं कि इक्कीसवीं सदी में सबसे जरूरी बात है कि इन नेताओं का संदेश अलग-अलग मीडिया माध्यमों से लोगों तक पहुंचे। कम्युनिकेशन का कौन सा चैनल सबसे बेहतरीन तरीके से लोगों पर असर करेगा, इसके पीछे की रणनीति की पहचान जरूरी है। इसलिए जब दुष्यंत चौटाला ने अपनी बात को लाखों लोगों तक असरदार तरीके से पहुंचाने की कोशिश की तो चुनाव नीति ने उनके लिए बेहतरीन रणनीतियां बनाई।

गजेंद्र यह भी बताते हैं कि दुष्यंत चौटाला के तमाम वीडियो कैंपेन की अगुवाई उन्होंने खुद ही की। जिनमें से सबसे सफल कैंपेन थे-

‘दुष्यंत ही रहेगा सही’,

‘हर दिल में हरियाणा हर दिल में दुष्यंत’

‘दम है दुष्यंत में’

‘दुष्यंत आएगा बदलाव लाएगा’

‘उम्मीद सिर्फ दुष्यंत से’

‘आ गया दुष्यंत छा गया दुष्यंत’

‘मेरा वोट दुष्यंत को’

गजेंद्र कहते हैं कि चुनावी कैंपेन के उनके इसी यूनीक तरीके ने हरियाणा के लोगों के सिर आंखों पर जेजेपी को बिठा दिया। हालांकि इसका पूरा क्रेडिट अपनी संस्था चुनाव नीति को देते हैं और कहते हैं कि हरियाणा के पहले उनकी संस्था ने दिल्ली पंजाब राजस्थान मध्य प्रदेश की चुनाव में काम किया है।

चुनाव नीति के संस्थापक के तौर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गजेंद्र शर्मा कहते हैं लोगों का कहना है कि डाटा ही ऑयल की तरह सबसे कीमती है लेकिन मैं कहता हूं नए जमाने में कंटेंट ही महंगे ऑयल की तरह बेशकीमती है।

जनसंवाद पर टिप्पणी करते हुए गजेंद्र कहते हैं एक पब्लिक फिगर किस संदेश को किस तरह से कम शब्दों में ज्यादा असरदार तरीके से अधिकतम लोगों तक पहुंचाए, ये जानना भी एक खूबी है। वैसे ये चुनाव प्रचार देखने के बाद गजेंद्र खुद इस पैमाने पर खुद को साबित करते हुए देखते हैं

पिछले कुछ सालों से चुनाव के बदले हुए मिजाज पर प्रतिक्रिया देते हुए गजेंद्र कहते हैं कि ‘अब चुनाव किसी एक व्यक्ति पर केंद्रित होकर लड़ा जाता है और ऐसे में संभव नहीं है कि वह खास व्यक्ति हर चुनावी सीट तक पहुंचे और हर व्यक्ति तक अपना संदेश पहुंचा सके इसलिए हमारी चुनाव नीति जैसी संस्थाओं का की जरूरत पड़ती है जो प्रभावित करने वाली छवि बनाने का काम करती है।’

चुनाव के पहले के हालातों की ओर इशारा करते हुए गजेंद्र कहते हैं कि ‘पहले का देखा जाए तो ज्यादातर पार्टियां जेजेपी के वजूद को ही नकार रही थी, जेजेपी के किसी असरदार भूमिका को नकार रही थी, लेकिन बहुमत की सरकार चलाने वाली बीजेपी को भी इस चुनाव के बाद दुष्यंत चौटाला के सहयोग से सरकार चलानी पड़ रही है और खुद दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री बनाना पड़ा है। नकारे जाने से लेकर सत्ता तक पहुंचाने के बीच जो असरदार चुनावी कैंपेन नाम का फैक्टर जिम्मेदार होता है हम उसी काम को हम अपनी खूबी समझते हैं।’

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