राष्ट्रीय सुरक्षा को आखिर ऐसा कौन सा खतरा उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को नजर आ गया है जो कल उसने ‘यूपी स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स’ SSF के गठन को मंजूरी दे दी ?

इस फोर्स को ढेर सारी असीमित शक्तियां दी गई हैं। जिनमें बिना वारंट गिरफ्तारी और तलाशी की पावर भी शामिल है।

एक ओर बड़ी बात यह है कि बिना सरकार की इजाजत के एसएसएफ के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट भी संज्ञान नहीं लेगी। यूपी एसएसएफ अलग अधिनियम के तहत काम करेगी।

अभी उत्तर प्रदेश में राज्य में कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी यूपी पुलिस, पीएसी और आरआरएफ की थी, लेकिन अब एसएसएफ भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी

यूपी एसएसएफ को स्पेशल पॉवर दी गई हैं। इसके तहत यूपी एसएसएफ के किसी भी सदस्य के पास अगर यह विश्वास करने का कारण है कि धारा 10 में निर्दिष्ट कोई अपराध किया गया है या किया जा रहा है और यह कि अपराधी को निकल भागने का, या अपराध के साक्ष्य को छिपाने का अवसर दिए बिना तलाशी वारंट प्राप्त नहीं हो सकता तब वह उक्त अपराधी को निरुद्ध कर सकता है।

इतना ही नहीं वह तत्काल उसकी संपत्ति व घर की तलाशी ले सकता है। यदि वह उचित समझे तो ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है, लेकिन शर्त यही है कि उसे यह विश्वास हो कि उसके पास यह वजह हो कि उसने अपराध किया है।

इस तरह की पावर सिर्फ आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में फोर्स को दी जाती है जैसे असम राइफल्स के जवानों को पूर्वोत्तर के राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड और मिजोरम के सीमावर्ती जिलों में बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और किसी भी स्थान की तलाशी लेने का अधिकार दिया गया है लेकिन वहाँ की परिस्थिति बेहद भिन्न है। कश्मीर में भी सेना इन्ही पावर का इस्तेमाल करती है।

क्या योगी सरकार समझ रही है कि आतंकवाद प्रभावित पूर्वोत्तर भारत, कश्मीर और उत्तर प्रदेश में कोई अंतर ही नही रह गया है ?

दरअसल जब पहली बार यूपी स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स का विचार सामने आया था तो यह बताया गया था कि इस फोर्स को सीआईएसएफ की तर्ज पर बनाया जाएगा।

सीआईएसएफ की तरह ही एसएसएफ यूपी में मेट्रो रेल, एयरपोर्ट, औद्योगिक संस्थानों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों, ऐतिहासिक, धार्मिक व तीर्थ स्थानों, जनपदीय न्यायालयों की सुरक्षा करेगा यानी राज्य में महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों, दफ्तरों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएगी।

कल जिस अधिनियम को लागू किया गया है उसमे एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि प्राइवेट कंपनियां भी भुगतान कर एसएसएफ की सेवाएं ले सकेंगी। अब ये समझ नही आ रहा है कि कैसे एक प्राइवेट कंपनी को सेवा देने वाली बॉडी को ऐसी एब्सोल्यूट पावर दी जा रही हैं

साफ दिख रहा है कि यह एक काला कानून है जिसे आने वाले जनाक्रोश के उभरने के पहले ही लागू कर दिया गया है।

( ये लेख गिरीश मालवीय की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है। )

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