बीजेपी धर्म के नाम पर माहौल बनाने में उस्ताद है। इस पार्टी के एक सांसद हैं हरनाथ सिंह यादव। इन्होंने तीन जनवरी को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखा।

उसमें लिखा कि यह पत्र भगवान श्रीकृष्ण ने लिखने के लिए प्रेरित किया है कि योगी जी मथुरा से चुनाव से लड़ें। इस तरह का दावा बीजेपी का ही सांसद कर सकता है। खैर उन्होंने दावा किया और राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र भी लिख दिया।

क्या हरनाथ सिंह यादव अब इस्तीफा दे देंगे? क्या उन्हें उस पार्टी को छोड़ नहीं देना चाहिए जहां इतनी मुश्किल से टाइम निकाल कर भगवान एक सांसद को प्रेरित करते हैं कि आप मुख्यमंत्री की पैरवी करें और पार्टी भगवान की प्रेरणा को ठुकरा देती है।

योगी आदित्यनाथ उसी गोरखपुर से चुनाव लड़े हैं जहां उनका गढ़ है। यह पार्टी का फैसला था या उनका इसे जानकर क्या होगा लेकिन हरनाथ सिंह यादव बताएं कि उन्हें भगवान कृष्ण कब और कैसे प्रेरित किया?

यह भी बताएं कि उनकी पार्टी ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से लिखे पत्र का अनादर कर भगवान का अनादर किया है या आदर किया है? नौटंकी की भी हद होती है। चुनाव के लिए भगवान का भी इस्तेमाल करने लगते हैं।

अब इसके बाद अचानक माहौल बनाया जाता है कि योगी अयोध्या से लड़ेंगे। जागरण और उजाला जैसे अखबार एक ही दिन पहले पन्ने पर छापते हैं। उजाला ने तो दबा दबा सा छापा लेकिन जागरण ने भौंकता शीर्षक लगाया।

गोदी मीडिया के चैनलों ने अयोध्या के नाम पर माहौल बनाना शुरू कर दिया लेकिन अंत में योगी आदित्यानाथ गोरखपुर से ही चुनाव लड़ने चले गए। जब वहीं से लड़ना था तब फिर अयोध्या और मथुरा के नाम पर माहौल क्यों बनाया गया?

यह ठीक है कि बीजेपी चुनावी रेस में आगे हैं लेकिन उसके पास माहौल बनाने के लिए भगवान के नाम पर झूठ बोलने के अलावा कुछ नहीं है। वर्ना पांच साल में जो भव्य विकास हुआ है उसकी तस्वीर पर बहस होती और उसके नाम पर कहीं से चुनाव लड़ सकते थे।

इतना विकास हुआ है कि यूपी में पंद्रह करोड़ लोगों को महीने में दो बार मुफ्त राशन देना पड़ रहा है, सात करोड़ से अधिक श्रम कार्ड बनवा कर डेढ़ करोड़ कार्डधारकों के खाते में हज़ार रुपये डाले गए, बाकी को छोड़ दिया गया, मानदेय और भत्ते बढ़ाए गए, लाखों नौकरियां देने का दावा किया गया, जनता के पैसे फूंक कर अखबारों में एक्सप्रेस वे और हाईवे के विज्ञापन छापे गए, इसके बाद भी अयोध्या और मथुरा के नाम पर माहौल बनाया गया। पता नहीं ये भगवान के नाम पर झूठ बोलते हैं या विकास के नाम पर।

गोदी मीडिया को समझ नहीं आ रहा होगा कि अब क्या करें। अयोघ्या और मथुरा के नाम पर माहौल बनाया, योगी जी तो गोरखपुर चले गए। अब गोदी मीडिया बताए कि किस आधार पर यह माहौल बनाया जा रहा था?

क्या गोदी मीडिया अपने आप राम और कृष्ण का इस्तेमाल कर रहा था या बीजेपी के इशारे पर कर रहा था? इस तरह से हिन्दी अखबार और गोदी मीडिया के चैनल दर्शकों को बेवकूफ बना रहे हैं।

गोदी मीडिया के ऐंकरों की वो क्लिप निकाल कर ज़रा देखिए कि पांच महीने से योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने के नाम पर किस तरह मतदाता के दिमाग़ में धर्म की तस्वीरें पहुंचाई जा रही थीं। विकास हुआ होता तो इन चैनलों पर विकास की तस्वीरों को लेकर बहस हो रही होती।

इन चैनलों ने यूपी और बिहार के राजनीतिक माहौल का सत्यानाश कर दिया है। योगी कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन लड़ तो रहे हैं गोरखपुर से हीं।

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