अमेरिका में ट्रंप समर्थकों ने जो हिंसा की और जिसे खुद ट्रंप ने उकसाया, वह सत्ता की भूख आदमी को किस हद तक पागल बना सकती है, इसका सबसे डरावना उदाहरण है।

हर गलत तरीका आजमाने और सबमें नाकामयाब होने के बाद भी ट्रंप नहीं मान रहा। चार लोग इस हिंसा में मारे जाने की अभी तक सूचना है।

अब भी ट्रंप धमका रहा है कि हम आसानी से सत्ता नहीं छोड़ेंगे, जबकि संसद में उसके समर्थक भी उसका साथ छोड़ चुके हैं। उसने उस समय अमेरिकी संसद में अपने गुंडे घुसवाए, जब राष्ट्रपति चुनाव की सबसे अंतिम औपचारिकता पूरी हो रही थी।

संसद के संयुक्त अधिवेशन में उपराष्ट्रपति माइक पेंस की सदारत में जो बाइडेन के निर्वाचन को अंतिम स्वीकृति दी जानी थी। जाहिर है न तो अमेरिकी संसद, न उपराष्ट्रपति इस मामले में ट्रंप के साथ हैं और उम्मीद की जा रही है कि कुछ देर में जो बाइडेन के निर्वाचन की पुष्टि हो जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ठीक किया कि ट्रंप समर्थकों की हिंसा की निंदा की और शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तांतरण का समर्थन किया।

आशा है कि अगर भारत में 2024 में मोदी चुनाव हार जाते हैं तो भी उनका और उनके समर्थकों का रुख यही रहेगा, जो अमेरिका के संदर्भ में आज है।

उम्मीद तो करनी ही चाहिए और अगर यह पूरी नहीं होती है तो भारत में जो दृश्य होगा,उसकी कल्पना करना भी असंभव है। यहाँ सबकुछ पूरी तरह एक आदमी की मुट्ठी में आ चुका है, जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था।

( यह लेख विष्णु नागर की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है )

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

5 × 4 =