स्वीडन की संस्था ने कहा, भारत में लोकतंत्र खत्म होने के करीब है. ‘वी- डेम इंस्टीट्यूट’ ने 179 देशों का अध्ययन करते हुए ‘उदार लोकतंत्र सूचकांक’ जारी किया है.

इस सूची में भारत 179 देशों में 90वें पायदान पर है. इस सूची में भारत के पड़ोसी श्रीलंका 70वें और नेपाल 72वें स्थान पर हैं.

इस अध्ययन का पैमाना है: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की स्वतंत्रता, सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता, चुनावों की गुणवत्ता, मीडिया में विचारों की जगह और शिक्षा में स्वतंत्रता.

रिपोर्ट में कहा गया है, मीडिया, सिविल सोसाइटी और मोदी सरकार में विपक्ष के विरोध की जगह कम होती जा रही है, जिसके कारण लोकतंत्र के रूप में भारत अपना स्थान खोने की क़गार पर है.

संस्था के निदेशक स्टाफ़न लिंडबर्ग ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “कई लोकतंत्र के स्तंभ हैं, जो भारत में कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं.

मोदी के सत्ता में आने के दो साल पहले इनमें से कुछ इंडिकेटर्स में गिरावट आनी शुरू हो चुकी थी, लेकिन वास्तव में इसमें नाटकीय गिरावट मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से आने लगी.”

लिंडबर्ग ने बताया, “मेरे विचार में पिछले पाँच से आठ सालों में स्थिति अधिक बिगड़ गई है. भारत अब लोकतंत्र न कहलाए जाने वाले देशों की श्रेणी में आने के बिल्कुल क़रीब है. हमारे इंडिकेटर्स बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में सरकार के प्रति मीडिया का पक्ष लेने का सिलसिला काफ़ी बढ़ गया है.

सरकार की ओर से पत्रकारों को प्रताड़ित करना, मीडिया को सेंसर करने की कोशिश करना, पत्रकारों की गिरफ़्तारी और मीडिया की ओर से सेल्फ़ सेंसरशिप की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.”

लोकतंत्र के कई जानकारों ने इस रिपोर्ट से सहमति जताई है.

( यह लेख पत्रकार कृष्णकांत की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है )

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

fourteen + 10 =