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पत्रकारों ने बाढ़ को बनाया पिकनिक स्पॉट, केले के थम पर तैरकर शूटिंग करने के लिए एंकर ने किया ग्रामीणों का का इस्तेमाल
एक तरफ लाखों लोगों के लिए बाढ़ त्रासदी बनकर आई है। इसकी वजह से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है दूसरी तरफ कथित पत्रकारों के लिए ‘बाढ़ क्षेत्र’ एक पिकनिक स्पॉट में बदल चुके हैं।
पानी की जिस धारदार बहाव से असम, बिहार और मुंबई के कई हिस्सों में लोग विचलित हो जा रहे हैं उसी को पूल समझकर ये पत्रकार तैरते हुई रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। ऐसा करने के लिए भी खुद कष्ट नहीं उठा रहे हैं बल्कि पहले से ही असुविधा में जी रहे ग्रामीणों से अपना बोझा उठवा रहे हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो ग्रामीणों की इस बदहाली का मजाक उड़ा रहे हैं।
कथित मेनस्ट्रीम मीडिया के एंकरों की ऐसी तस्वीरों को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना की जा रही है।
वायरल तस्वीर में दिख रहा है कि कैसे ‘इंडिया टुडे’ समूह की एंकर चित्रा त्रिपाठी अपने माईक के साथ केले के थम पर बैठकर रिपोर्टिंग कर रही हैं, और तीन चार लोग इस थम का बोझा उठाए हुए हैं ताकि एंकर पानी में न चली जाएं।
पहली बात तो बाढ़ की विभीषिका दिखाने के लिए तैरने और उतराने की जरूरत नहीं है। दूर से और जितनी ऊंचाई से विजुअल लिए जाएंगे इतनी ही ज्यादा चीजें दिख पाएंगी। लेकिन लोगों की बदहाली का मज़ाक उड़ाते इन पत्रकारों को इसकी कोई फिक्र नहीं है। जिन ग्रामीणों की हर संभव मदद की जानी चाहिए थी उनको ही अपने इस ‘विशेष शूटिंग’ में लगा दिया गया है।
मीडिया की इन हरकतों से नाराज़ तमाम लोग सोशल मीडिया पर आलोचनात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
इस वायरल तस्वीर को फेसबुक पर शेयर करते हुए अभिनव लिखते हैं- ‘कुछ दिन पहले पत्रकारिता आई.सी.यू में थी, अब केला के थम पर आ गई है.’

चित्रा की ही एक अन्य तस्वीर शेयर करते हुए फेसबुक पर नरेंद्र झा लिखते हैं-ध्यान से देखिये इन मीडियाकर्मियों को..

इनके लिए ‘बाढ़’ त्रासदी नही, विभीषिका नही…महज मनोरंजन मात्र है ,और पीड़ित… एक मजाक मात्र !
शर्मनाक !!

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