अशोक चक्र सम्मानित हेमंत करकरे का अपमान कर प्रज्ञा ने और बीजेपी ने जघन्य/अक्षम्य अपराध किया है। यह अपराध माफी मांगने से भी माफ़ नहीं होगा। जिसने एटीएस मुखिया होने के नाते फ्रंट से लीड किया,सीने पर तीन गोलियां खाई, जान की बाजी देश के लिए लगा दिया, उन्हीं के कारण कसाब जिन्दा पकड़े गए।

दूसरी ओर उस वीर की पत्नी कविता करकरे भी एक वीरांगना थी। उनके पति देश के लिए शहीद हुए तो उन्होंने भी 2014 में ब्रेन डेड के बाद तीन लोगों को नई जिंदगी दी।

कविता की एक किडनी 48 साल के एक शख्स को दी गई जो दस साल से डायलिसिस पर बस इस इंतजार में था कि कोई जिंदा रहने के लिए उसे एक किडनी दे दे। दूसरी किडनी जसलोक अस्पताल में एक 59 साल के व्यक्ति को दी गई जो सात साल से किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहा था।

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कविता के लीवर ने कोकिला बेन अस्पताल में 49 साल के एक व्यक्ति को नई जिंदगी दी। परेल के हाजी बलूची में दान की गई कविता की आंखे भी लोगों की रोशनी बन रही है।

उनके इस महादान में उनके तीन बच्चों का भी हाथ था। उन्होंने भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए महादान की इजाजत दिया। इस परिवार ने देश को बता दिया वह जान देना भी जानते हैं और जिंदगी देना भी। यह वीरों का परिवार है।

आतंकियों ने हेमंत करकरे की हत्या कर दी, इन हत्यारों को प्रज्ञा ठाकुर ने बुलाया था या इनके आका ने ?

जिन्होंने अपना सर्वस्व देश के लिए न्यौछावर कर दिया। हम इस परिवार के प्रति कृतज्ञ हैं,और आजीवन रहेंगे। प्रज्ञा ने महापाप किया है, उसे अब देश भर के लोगों का शाप लगेगा। इस महान परिवार के लिए फिर से शीश झुकाता हूँ!