17 जुलाई को ही अमित शाह ने कहा था कि 22 जुलाई से सोशल मीडिया पर तिरंगा की तस्वीर लगाने का अभियान चलेगा। सभी सोशल मीडिया के खाते की डिस्प्ले पिक्चर DP में तिरंगा की तस्वीर लगाए।

22 जुलाई आ गई, किसी ने कुछ नहीं किया जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से बैठक के बाद अपील की थी। संघ ने भी अमित शाह की अपील पर अपनी DP में तिरंगा की तस्वीर नहीं लगाई।

प्रधानमंत्री ने भी DP नहीं बदली न मंत्रियों ने। कई दिन बीत गए तब प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की कि 2 अगस्त से सभी अपनी DP में तिरंगा लगाए। ऐसे में संघ प्रमुख की DP बदल जानी चाहिए थी।

कई लोग चैलेंज कर रहे हैं कि संघ तिरंगा की तस्वीर डीपी में नहीं लगाएगा। अभी के लिए यह चैलेंज सही भी है लेकिन कई दिन बाक़ी हैं। हो सकता है अगले कुछ दिन में लगा दे।

सवाल यह भी होना चाहिए कि 2002 के पहले की भी कोई तस्वीर लगाए। जिससे पता चले कि 2002 के पहले संघ अपने मुख्यालय पर तिरंगा फहराता रहा है। उसके पुराने नेताओं की खूब सारी तस्वीरें होंगी।

जिस तरह से बीजेपी इस अभियान में लगाई गई है,यह कहना जल्दीबाज़ी हो सकती है कि संघ के कार्यकर्ता बीजेपी का काम नहीं करेंगे।तिरंगा अभियान के लिए नहीं निकले होंगे।

जल्दी ही संघ के कार्यकर्ता तिरंगा लेकर मोदी जी का दिया हुआ टास्क पूरा करते नज़र आ जाएँगे।

तिरंगा बनाने के कारोबार का भी हिसाब कभी होगा ही। गुजरात में हज़ारों लोगों को काम मिला है। क्या इसका संबंध चुनाव से पहले तिरंगा बनाने के बहाने लोगों को थोड़े समय के लिए सही, रोज़गार देना है। जैसे ही उम्मीद ख़त्म होती है दो चार हफ़्तों का काम देकर उम्मीद पैदा कर दी जाती है।

मैं इसे एक उदाहरण के रूप में रखना चाहता हूँ ताकि आप घर-घर तिरंगा अभियान के पीछे की मानसिकता को समझ सकें ।

“15 अगस्त को अनगिनत जगहों पर करोड़ों लोग तिरंगा फहराते हैं। इस पर मोदी शाह अपना ठप्पा लगाना चाहते है।आप रोज़ नहाते हैं, एक दिन मोदी जी ने कह देंगे कि रोज़ नहाना चाहिए और देश कहने लग जाए कि हम मोदी जी के कहने पर नहा रहे हैं। घर-घर तिरंगा अभियान वही है।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

10 + eighteen =