मिज़ोरम और असम की सीमा पर कल पूरे दिन तनाव रहा बल्कि यह तनाव कई दिनों से बना हुआ है। दोनों तरफ के लोग आमने-सामने हो गए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा है कि मिज़ोरम की तरफ से चली गोली में असम के छह पुलिस जवान मारे गए हैं।

दोपहर 1 बज कर 50 मिनट पर मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री अमित शाह को टैग करते हुए ट्वीट किया कि अमित शाह जी कुछ कीजिए। हिंसा को रोकिए। मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा ने हिंसा का वीडियो ट्वीट किया था।

इसके कुछ देर बाद असम के मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा भी अपना वीडियो ट्वीट किया कि कि माननीय मुख्यमंत्री जी मिज़ोरम के पुलीस अधीक्षक हम लोगों से कह रहे हैं कि जब तक आप पीछे नहीं हटेंगे तब तक उनके नागरिक न तो सुनेंगे न हिंसा रोकेंगे। ऐसे हालात में हम सरकार कैसे चला सकते हैं।

जवाब में मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा ने भी हिमंता बिस्वा शर्मा को टैग किया और लिखा कि अमित शाह जी के साथ हुई सौहार्दपूर्ण बैठक के बाद भी ये हैरानी की बात है कि असम पुलिस की दो टुकड़ियों और नागरिकों ने मिज़ोरम की सीमा के भीतर घुस कर वहाँ के निवासियों पर लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े गए।

इस तरह से पूर्वोत्तर के दो राज्यों के मुख्यमंत्री ट्वीटर पर सार्वजनिक रुप से झगड़ते रहे और ज़मीन पर दोनों तरफ के लोग आमने-सामने बने रहे।

अपना-अपना वीडियो जारी कर दावा करते रहे कि दूसरी तरफ से हिंसा हो रही है। मिज़ोरम और असम की सीमा पर तनाव कई दिनों से बना हुआ था।

दो दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्वोत्तर का दौरा किया था। शिलांग में आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों से बात की थी। अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर में आंदोलन, आतंकवाद और हथियार का दौर ख़त्म हो गया है।

इस बयान के दो दिन बाद मिज़ोरम और असम के मुख्यमंत्री पहले झगड़ते हैं और फिर सुलह का दावा करते हैं। मिज़ोरम में मिज़ो नेशनल फ्रंट की सरकार है जिसमें बीजेपी सहयोगी है। असम में बीजेपी की सरकार है।

राजनीति में ट्वीटर का इस्तमाल ट्रोल पैदा करने के लिए हुआ। राजनीतिक समर्थन की कीमत लोगों को ट्रोल बनाकर वसूली गई। इस प्रक्रिया में राजनेता भी ट्रोल बन गए हैं। एक दूसरे को ट्रोल कर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा तो तबके स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने जवाब दिया और अनाप-शनाप कहा। जबकि एक पूर्व प्रधानमंत्री के पत्र का जवाब प्रधानमंत्री की तरफ से ही दिया जाना चाहिए था।

हिन्दी प्रदेश के चैनलों में पूर्वोत्तर को लेकर वैसे ही खामोशी रहती है। दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच सार्वजनिक कहासुनी उनके लिए ख़बर नहीं है।

ख़बर करेंगे तो फिर उस सवाल से टकराना होगा कि गृह मंत्री अमित शाह का दौरा नाकाम रहा और मज़बूत नेतृत्व वाले प्रधानमंत्री मोदी के रहते ये सब हो रहा है।

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