प्रधानमंत्री मोदी देश में टीका उत्सव मनाने का बोल रहे हैं और देश के अस्पतालों में आक्सीजन की कमी से मौते लगातार बढ़ती ही जा रही है।

मध्यप्रदेश में स्थिति सबसे विकट बनी हुई है। ऑक्सीजन की कमी के कारण अब सांसों पर कोरोना भारी पड़ रहा है और लोग अकाल मौत मर रहे है।

सागर-उज्जैन में पिछले 72 घंटे में ऑक्सीजन की कमी से 15 लोगों की मौत हो गई। सागर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 10 लोगों की मौत हुई, जबकि उज्जैन के माधव नगर अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 5 मरीजों की मौत हुई।

प्रशासन अपना पल्ला झाड़ रहा है कि उज्जैन में आक्सीजन की कमी से मौत नही हुई है, जबकि उज्जैन में भाजपा के मंडल अध्यक्ष जितेंद्र शेरे की आक्सीजन की कमी से मौत के बाद गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में तोड़फोड़ भी की।

उन्हें रोकने के लिए पुलिसकर्मी आए तो कार्यकर्ताओं ने उनके साथ भी धक्का-मुक्की की। अस्पताल के प्रभारी और विकास प्राधिकरण के सीईओ सुजान सिंह रावत को भी भाजपा कार्यकर्ता मारने पहुंचे।

रावत ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। उसके बाद भी भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा कम नहीं हुआ उन्होंने लात मार कर दरवाजा तोड़कर अधिकारी के साथ मारपीट करनी चाही।

स्थिति बेहद विकट है। प्रशासन की नींद तभी खुलती है जब मरीज मौत के मुँह में पुहंच जाता है। अस्पतालों ने अपने यहाँ बाहर सूचना लगा दी है कि आक्सीजन की कमी से पेशेंट की मृत्यु होती है तो उनकी जिम्मेदारी नही होगी।

महाराष्ट्र और गुजरात से ऑक्सीजन की सप्लाई बंद राज्य के 250 से ज्यादा अस्पतालों में आक्सीजन की कमी हो गयी है।हालात इतने खराब है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में गुजरात से मदद दिलाने का आग्रह करना पड़ा।

सवाल यह है कि पिछले साल भी जब कोरोना के चलते हालात गंभीर हुए थे, तब भी ऐसी ही संकटकालीन स्थिति बनी थी। सरकार ने उससे सीख लेते हुए पहले से व्यवस्थाएं सुनिश्चित क्यों नहीं कीं?

(यह लेख गिरीश मालवीय की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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