पतित हो चुकी भारतीय मीडिया पर भरोसा मत करिए. लाल किले के मुख्य स्थान पर फहराने वाला तिरंगा सुरक्षित है. उसे किसी ने हाथ नहीं लगाया. वहां मौजूद जनवादी पत्रकारों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लाल किले पर लहराने वाले ‘तिरंगे’ से किसी ने हाथ नहीं लगाया है.

लाखों किसानों के बीच मौजूद एक हुडदंगी की उस विडियो पर गुस्सा मत हो आइए. सरकारी मीडिया ऐसी ही तस्वीरों का सुबह से इंतजार कर रहा था.

लाखों किसानों में से उसे सिर्फ एक हुडदंगी की विडियो आपको दिखानी है. यही एजेंडा है कैसे एक विडियो से लाखों किसानों को किनारे किया जाए.

लेकिन वो आपको ये नहीं बताएगी कि जिसने भी अपनी धर्म पताका लहराई है वह अपने खुद के खाली पोल पर लहराई है. इससे कम से कम उन लोगों को आपत्ति नहीं होनी चाहिए जिन्होंने संभु रैगर के समर्थन में निकली भीड़ द्वारा उदयपुर जिला न्यायालय के ऊपर लहराए भगवा झंडे का विरोध नहीं किया.

मीडिया आज पूरी रात आपको इसी एक आदमी की तस्वीर दिखाएगी लेकिन लाखों किसानों के हाथों में लहराते तिरंगे नहीं दिखाएगी. क्योंकि इससे उसका एजेंडा फुस्स हो जाता है.

अगर सरकार दो महीनें के पर्याप्त समय में अपनी हठधर्मिता छोड़ देती तो राजधानी में ये दिन नहीं देखना पड़ता.

हुडदंगियों के एकाध वीडियो को देखते समय एकबार सरकार द्वारा पिछले 2 महीने में किए गए लाठीचार्ज, आसूं गैस के गोलों, किसानों पर UAPA लगाने, 140 किसानों के शीतलहरों में मर जाने को याद कर लीजिएगा.

उग्र होते किसानों की कोई भी तस्वीर उस जुल्म के आगे हल्की नजर आएगी. हुडदंगियों की विडियो सरकार से कम हुडदंगी नजर आएगी.

इस सरकार से ज्यादा हिंसक कोई नहीं है, इस सरकार से बड़ा गुंडा कोई नहीं है ये याद रखिए. मीडिया के बहकावे में मत आइए.

( यह लेख पत्रकार श्याम मीरा सिंह की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है )

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