मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कल मोदी सरकार को भरी सभा में खूब खऱी-खऱी सुनाई। उन्होंने कहा कि सरकार बयान तो बहुत देती हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाती।

वाहन उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (SIAM) के 61वें सालाना सम्मेलन को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि ‘‘हम ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं, जहां उद्योग में लंबे समय से गिरावट आ रही है।

मैंने अभी अमिताभ कांत (नीति आयोग के सीईओ) की बातों को सुना। सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने वाहन उद्योग के महत्व के बारे में बयान दिया है,

लेकिन ठोस कदम की बात की जाए, जिससे गिरावट की प्रवृत्ति थमेगी, मैंने कुछ भी जमीन पर होते नहीं देखा.’’

भार्गव ने कहा कि अतिरिक्त बिक्री के संदर्भ में बातों से कुछ नहीं होता लेकिन आपको इसे हकीकत रूप देने के लिये ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

यह अब पुरानी बात है कि का उद्योग और यात्री कार शान-शौकत की चीज है और केवल इसे अमीर ही उपयोग करते हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि यह सोच अभी भी कायम है।

उन्होंने कहा कि आंकड़े सभी के सामने है लेकिन स्थिति में सुधार को लेकर कोई उपाय नहीं किये गये।

‘अगर वाहन उद्योग को अर्थव्यवस्था तथा विनिर्माण क्षेत्र को गति देना है, देश में कारों की संख्या प्रति 1,000 व्यक्ति पर 200 होनी चाहिए जो अभी 25 या 30 है। इसके लिए हर साल लाखों कार के विनिर्माण की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, ‘क्या हम आश्वस्त हैं कि देश में पर्याप्त संख्या में ग्राहक हैं जिनके पास हर साल लाखों कार खरीदने के साधन हैं? क्या आय तेजी से बढ़ रही है?

क्या नौकरियां बढ़ रही है? मुझे लगता है कि जब हम अपनी योजनाएं बनाते हैं, इन पहलुओं को हमेशा छोड़ दिया जाता है।’

(यह लेख गिरीश मालवीय की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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