क्या आपने ध्यान दिया कि इस बार सबसे ज्यादा जोर मास्क पर दिया जा रहा है। पिछली बार जैसे बार बार हाथ धोने या सेनेटाइजर इस्तेमाल करने की बात नही की जा रही है।

न्यूज़ चैनल पर देख लीजिए सुबह शाम ‘मास्क नही लगा रहे’, ‘मास्क नही लगा रहे’ यही चलाया जा रहा है।

आप समझिए कि ऐसा क्यों किया जा रहा है? दरअसल मोदी सरकार पूरे एक साल में कोरोना मरीजों के लिए कोई भी विशेष व्यवस्था नही कर पाई है, न सरकारी अस्पतालों में बेड बढ़ाए गए हैं, न ही कही स्वास्थ्य कर्मियों या डॉक्टरों की स्पेशल भर्ती की गई है। ओर न ही कोई फंड रिलीज किया गया है।

पिछली बार जो जगह जगह पर ‘कोविड सेंटर’ टाइप के इवेंट किये गए थे वो सब किसी काम के नही निकले अब सभी जगह वो बन्द कर दिए गए हैं और उन्हें दुबारा शुरू करने के भी कोई बात नही कर रहा है।

PM केअर फंड में कितना पैसा आया? उसका क्या उपयोग हुआ ? कुछ नही बताया गया। पता नहीं कौन से गड्ढे में उस पैसे को डाल दिया गया है?

कोविड की वेक्सीन ड्राइव चलाना कोई निदान नही है, बीमारी का इलाज महत्वपूर्ण है सरकारी कोविड स्पेशल हस्पतालों की संख्या बढाना उसके इंतजाम करना अधिक महत्वपूर्ण है यहाँ पर केंद्र सरकार बिल्कुल फेल है।

इसलिए अब सारा दोष जनता पर डाला जा रहा है कि वो मास्क नही लगा रही है। लापरवाही दिखा रही है इसलिए कोरोना फैल रहा है।

यहाँ सरकार अपने पाप छुपाने के लिए जनता को दोषी बतला रही है। और न्यूज़ चैनल पर भी इसलिए इसे दोहराया जा रहा है ताकि सरकार पर उठते सवालो का रुख मोड़कर जनता की तरफ उँगली उठा दी जाए। और सरकार की गलतियों की कोई बात भी नही निकले।

साल भर का समय मिला सरकार को !
आखिर किया क्या मोदी सरकार ने ?
पिछली बार मुसलमान निशाना बन गए ?
इस बार मास्क न पहनने वाले !

(यह लेख गिरीश मालवीय की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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