ये तस्वीर याद होगी, दिल्ली-हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन की सबसे आयकॉनिक पिक्चर। नाम नवदीप सिंह और उमर 26 साल।

कड़ी सर्दी में जब मोदी सरकार किसानों पर गंदा, बदबूदार और ठंडा पानी बरसवा रही थी तब ये नौजवान वॉटर केनन पर चढ़ गया।

आसपास चारों और पुलिस, आर्मी, हाथ में बंदूक़ और लाठियाँ। बंदे ने साहस दिखाया और तब तक वॉटर केनन की पाइप से लटका रहा जब तक कि पानी बरसाने वाली वॉटर केनन बंद नहीं हो गई।

इसी नौजवान पर मोदी सरकार ने मर्डर का केस लगा दिया है। केवल मर्डर ही नहीं नवदीप पर मोदी सरकार ने महामारी के उल्लंघन और दंगा भड़काने के चार्जेस लगाते हुए भी FIR दर्ज कर ली है।

समझ नहीं आता, आप शांतिपूर्ण तरीक़े से जंतरमंतर जाना चाहते हैं, पुलिस बल जबरन आपको रोकता है और ठंडे पानी से नहला देता है, जिस पानी में भीगने वाले अधिकतर अधेड़ और बुजुर्ग हैं उस पानी को रोकना “मर्डर” करना कैसे हो सकता है?

इसमें महामारी एक्ट कैसे लग सकता है? मोदी सरकार को किस एंगल से इसमें दंगा नज़र आ रहा है?

एक बार विचार करिए, हमारी मूर्खता और धर्मांधता के कारण आज क्या दिन आ गए हैं, जिस प्रधानमंत्री पर स्वयं दंगें करवाने के चार्जेस लगे हुए हैं, जिसके गृहमंत्री पर दंगे और मर्डर के सिरियस चार्जेस लगे हुए हैं और इसके लिए उसने जेल की हवा भी खाई है, वे लोग पानी की एक टंकी बंद करने पर किसान के बेटों पर मर्डर के चार्जेस लगा रहे हैं।

ये ही इस सरकार का असली चरित्र है, ऐसे ही झूठे मुक़दमें लगा-लगाकर इन्होंने मुसलमानों को जेल में डाला हुआ है, ऐसे ही जेएनयू, जामिया, एएमयू के छात्रों को झूठे मुक़दमों में फँसाया हुआ है। यही ट्रेंड ये सरकार किसान आंदोलन को दबाने के लिए अपना रही है।

लेकिन मोदी और उसकी सरकार ये बात कान में डालकर सुन ले, अगर हमारे बुजुर्गों, माता-पिताओं पर ठंडा पानी बरसाने वाली टंकी को बंद करना गुनाह है तो हमने ये गुनाह किया है। और तब तक करेंगे जब तक कि तुम्हारी पुलिस थक नहीं जाती, तुममें और तुम्हारी पुलिस में दम हो तो रोक लो…

( यह लेख पत्रकार श्याम मीरा सिंह की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है )

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