गिरीश मालवीय

क्या भारत के बड़े एडिटर एंकर/पत्रकार हंगरी के पत्रकारों जैसी हिम्मत दिखा पाएंगे ?

कल हंगरी के 80 पत्रकारों ने जो वहाँ न्यूज़ मीडिया में उच्च पदों पर बैठे हुए थे एकसाथ इस्तीफा दे दिया हंगरी के मुख्य स्वतंत्र समाचार साइट, इंडेक्स से तीन प्रमुख संपादकों सहित पत्रकारों के स्कोर के बाद बुडापेस्ट की सड़कों पर हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।

इंडेक्स जो हंगरी का सबसे बड़ा मीडिया हाउस है वहाँ एडिटर और रिपोर्टर्स की कुल संख्या 90 थी और इनमें से 80 ने हमेशा के लिए उस मीडिया हाउस को छोड़ने का फैसला कर लिया……..नौकरी छोड़ने से पहले एडिटोरियल बोर्ड ने इंडेक्स के वेबसाइट पर एक खुलापत्र भी प्रकाशित किया था, जिसमें कहा गया था कि हंगरी का यह एकलौता निष्पक्ष समाचार माध्यम था, पर अब यह ऐसा नहीं रहेगा क्योंकि यहाँ पर राजनैतिक दखलंदाजी शुरू हो चुकी है।

दरअसल कोरोना काल मे अप्रैल की शुरुआत में ही हंगरी की संसद ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए पीएम विक्टर ओर्बन को शासन करने के लिए असीमित शक्तियां दे दीं हंगरी की संसद में एक ऐसा बिल पास हुआ, जिसके बाद विक्टर अब अनिश्चितकाल तक के लिए असीमित शक्तियों वाले शासक बने रहेंगे. इसी के साथ देश में इमरजेंसी भी घोषित कर दी गई ..सरकार यहाँ वही खेल खेलना चाहती थी जो भारत मे मोदी सरकार कब से खेल रही है लेकिन हंगरी के मीडिया ने रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए विक्टर ओबर्न के सामने झुकने से इनकार कर दिया।

यहाँ तो बीजेपी एक टुकड़ा उछाल देती है और बिके हुए पत्रकार बावले पिल्ले के तरह दुम हिलाते हुए पीछे पीछे चल पड़ते हैं

न जाने भारत के रीढ़ विहीन पत्रकारों का खून कब खौलेगा?

(सोशलवाणी: ये लेख गिरीश मालवीय के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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