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सोबरन कबीर

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में हथियारों की खरीद पर दलाली खाई गई।

बीस साल बाद जया जेटली को चार साल की सजा हुई ….और फिर ढाई घंटे के अंदर हाईकोर्ट में बैठे जजों ने जया जेटली की सजा को सस्पेंड कर दिया..।।

ऐसा लगता है कि इस देश के न्यायालय सिर्फ दलितों, पिछड़ों , आदिवासियों, मुसलमानों को ही सजा सुनाने के लिए बने हैं।।

लालू यादव ने चारा घोटाले में एक पैसा नहीं लिया… ये स्वयं कोर्ट भी मानता है।।

फिर भी लालूजी आज जेल में है।।

ओम प्रकाश चौटाला पर आरोप है कि उन्होंने टीचर भर्ती में जाटों को भरकर कोई घोटाला किया है।।

आजम खान का तो गुनाह सिर्फ इतना है कि उन्होंने रामपुर में बच्चों को पढ़ने की एक यूनिवर्सिटी खुलवाई थी….बकरी चोरी का भी मुकदमा उन पर लाद दिया गया।।

डॉक्टर कफील खान ने भी बच्चों को बचाने का जुर्म किया था…।।

हार्दिक पटेल ने भी अपने समाज के लिए नौकरियों में भागीदारी की मांग की….उन पर देशद्रोह लगा दिया गया।।

हरियाणा के कई जाट देशद्रोह के आरोप में जेल में है , उनका कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने अपने समाज के लिए सरकारी नौकरियों में भागीदारी के आंदोलन में हिस्सा लिया..।।

छगन भुजबल का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने मंत्री रहते दिल्ली में बने महाराष्ट्र सदन में बाल गंगाधर तिलक जैसे जातिवादी नेताओं की मूर्ति नहीं बनवाई… भाजपा ने सत्ता में आते ही भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर छगन भुजबल को जेल में भेज दिया ।।

अखिलेश यादव को तो सौ-दो सौ रूपये की टोंटी का चोर तक बना दिया …।।

मेरा स्पष्ट मानना है कि लालू यादव , ओमप्रकाश चौटाला, छगन भुजबल, आजम खान, कफील खान अपनी जाति और धर्म के कारण जेल गए ।।

अदालतों में जज लोग नंगा होकर , निर्लज्ज होकर दलितों, पिछड़ों के खिलाफ फैसले दे रहे हैं।।

( सोशलवाणी: यह लेख सोबरन कबीर की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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