Nepal
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एक तरफ कोरोना माहमारी की वजह से पूरी दुनिया परेशान है और दूसरी तरफ भारत अपनी सीमाओं पर पड़ोसी मुल्कों से परेशान है। पाकिस्तान और चीन से परेशान भारत को अब नेपाल से भी दुश्मनी मोल लेनी पड़ रही है।

हालांकि ये सब अंतर्राष्ट्रीय मामले हैं और इनका सामना रणनीतिक स्तर पर किया जाता है। ऐसे मामलों में दोनों देशों की सरकारों को बातचीत के जरिए हल निकालना होता है।

लेकिन हमारे देश में स्थिति थोड़ी अलग है यहां पर सरकार और सेना के आगे आगे मीडिया अपनी हरकतें दिखाने लगता है।

मिसाल के तौर पर नेपाल विवाद को ले लें, इसमें तमाम मीडिया चैनलों ने शर्मनाक भूमिका निभाई है। राजनीतिक लड़ाई को राजनैतिक स्तर पर न रखकर दूसरों की निजी जिंदगी तक ले जाने वाले तमाम चैनलों ने न सिर्फ भारतीय मीडिया की बल्कि भारत देश की बदनामी करवाई है।

ज़ी न्यूज और TV9 ने नेपाल के प्रधानमंत्री ओली और चीन की महिला राजदूत होउ यांकी के बारे में मनगढ़ंत और आपत्तिजनक स्टोरी चलाई है।

कहा जा रहा है इसी से नाराज होते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री ने वहां पर भारतीय मीडिया पर बैन लगा दिया है।

इस मामले पर अपनी राय देते हुए गिरीश मालवीय लिखते हैं- हमारा मीडिया देश के नागरिकों के बीच साम्प्रदायिकता का जहर फैला कर घृणा और विद्वेष फैलाने से तो बाज आता नहीं है लेकिन इसकी हरकते अब इतनी अधिक बढ़ गई है कि यह हमारे पड़ोसियों से भी संबंध खराब करवा रहा है।

जी न्यूज़ चैनल पर नेपाल में चीन की महिला राजदूत होउ यांकी और पीएम केपी शर्मा ओली को लेकर एक स्टोरी चलाई गई. नेपाल की सरकार का कहना है कि एक विदेशी राजनयिक और प्रधानमंत्री ओली के बारे में सनसनीखेज़ दावे किए गए, जिनका हक़ीक़त से कोई संबंध नहीं है।

नेपाल के प्रमुख अख़बार काठमांडू पोस्ट ने लिखा है, ”भारतीय न्यूज़ चैनल ज़ी न्यूज़ ने नेपाल के पीएम ओली और चीन की महिला राजदूत होउ यांकी के संबंधों को लेकर सनसनीखेज़ दावे किए हैं जिनका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है. इस रिपोर्ट में बिना कोई सच्चाई के 15 मिनट का प्रसारण किया गया है।

दूसरा चैनल टीवी 9 भारतवर्ष TRP हासिल करने की दौड़ में घटिया हेडिंग लगाने में जी से भी आगे निकल गया वह लिखता है, ‘ओली की चाइनीज गोली इसलिए बदल गयी बोली’ बताइये और कितना नीचे गिरेंगे।

इन्ही सब बातों से चिढक़र नेपाल ने भारतीय न्यूज़ चैनलों पर प्रतिबंध लगाए है। और वाकई में इसी कारण लगाए है तो बिलकुल ठीक लगाए है।

(ये लेख पत्रकार गिरीश मालवीय के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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