Amitabh Bachchan

लॉक डाउन की रणनीति पूरी तरह से फेल थी यह नजर आ गया है। जब अमिताभ बच्चन जैसे व्यक्ति को कोरोना हो रहा है तो आप खुद समझिए कि यह किसी को भी हो सकता है क्या अमिताभ बच्चन घर से बाहर जाकर लौकी टिंडे खरीद रहे थे इसलिए उन्हें कोरोना हो गया? साफ है कि घर मे बैठे बैठे सारी प्रिकॉशन रखने के बावजूद आपको कोरोना हो रहा है।

आज देश मे 29 हजार के आसपास कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए है इंदौर, भोपाल ओर सूरत जैसे टियर 2 सिटीज में बड़े पैमाने पर मरीज मिलना शुरू हो गए है। इंदौर में पिछले तीन दिनों से 90 के लगभग मरीज रोज मिल रहे हैं।

भोपाल की भी यही हालत है यहाँ रविवार काे 102 नए काेराेना मरीज मिले है यह अब तक का एक दिन का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं ग्वालियर में रिकाॅर्ड 111 पाॅजिटिव मिले है।

मध्यप्रदेश के 10 जिले तो ऐसे हैं, जहां 98 दिन में कोरोना के जितने मरीज मिले थे, उससे ज्यादा तो जुलाई के 10 दिन में सामने आ चुके हैं। वहीं 10 जिले ऐसे भी हैं, जहां 10 दिन के भीतर ही कोरोना के मरीजों की संख्या डेढ़ गुनी हो गई है।

कमाल की बात यह है कि अब फिर से लॉक डाउन करने में प्रशासन के हाथ पाँव फूल रहे हैं जबकि यही इंदौर कलेक्टर 30 मार्च को कोरोना के कुल 24 मरीज हो जाने पर ऐसे डेस्परेट थे कि उन्होंने इंदौर में 7 दिन का देश मे सबसे कड़ा लोकडाउन घोषित कर दिया था यहां तक कि दूध, सब्जी, किराना जैसी रोजमर्रा की चीजों पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

एक वीडियो में उन्होंने शहरवासियों को हरी सब्जी नही खाने तक की समझाइश दे दी थी आज एक दिन में तीस मार्च तक आए कुल मामलों से चार गुना ज्यादा मामले निकल रहे हैं अब क्या करेंगे इंदौर कलेक्टर?

अब यहाँ कहा जा रहा है कि अनलॉक 2 में जनता ध्यान नही रख रही है,सब्जी मंडी में भीड़ बढ़ रही है, खाने-पीने की दुकानों पर लापरवाही बरती जा रही है इसलिए यहाँ मरीज बढ़ रहे हैं।

दरसअल यह मूर्ख बनाने की बात है मध्यप्रदेश में किल कोरोना अभियान चलाया जा रहा है अभियान के दौरान 11 हजार 458 सर्वे टीम लगाई गई हैं जो डोर-टू-डोर सर्वे कर रही है ऐसे में मरीजो की संख्या तो बढ़नी ही है।

सीधा गणित यह है कि जितने अधिक संदिग्धों की टेस्टिंग होगी उतनी ही कोरोना मरीजो की संख्या बढ़ती हुई नजर आएगी। अब कोरोना को नही बल्कि उसके पैनिक को काबू में लाना होगा अब मरीजो की संख्या बताकर रोज डराने की जरूरत नही है।

जब 80 प्रतिशत मरीज बिना किसी दवाई के सिर्फ साधारण देखभाल से ही ठीक हो रहे हैं तो रोज रोज कोरोना के आँकड़े दिखा कर जनता को डराना कौन सी समझदारी की बात है ? लेकिन WHO के हाथों बिकी हुई केंद्र और राज्य सरकारें यह करने से रही।

(ये लेख पत्रकार गिरीश मालवीय के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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