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Air India

एयर इंडिया के निजीकरण की तैयारी पूरी कर ली गई है। वैसे एयर इंडिया को तो बेचने की कोशिश पहले भी की जाती रही हैं लेकिन यह पहली बार है कि सरकार ने इसकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही हैं वर्ष 2018 में सरकार ने एयर इंडिया में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी और प्रबंधकीय नियंत्रण निजी हाथों में देने के लिए निविदा जारी की थी। लेकिन तब कोई सामने नही आया था

घाटे में चल रही एअर इंडिया पर हजारों करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें विमानों की खरीद और कार्यशील पूंजी हेतु लिए गए दीर्घकालिक कर्ज भी शामिल हैं एयर इंडिया की देनदारी बढ़कर 80 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है तथा उसे पिछले साल रोजाना 22 से 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस समय करीब 58 हजार करोड़ के कर्ज में दबी एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2018-19 में 8,400 करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ है।

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अब मोदी सरकार ने कह रही है कि पूरे हिस्सेदारी बेच देंगे बशर्ते खरीददार बस कर्ज का बोझ भी उठा ले। पहले केंद्र सरकार एयर इंडिया पर आधे से अधिक कर्ज को माफ करने पर विचार कर रही थी प्रस्तावित निवेशकों को कंपनी का 30,000 करोड़ रुपये के कर्ज का भार अपने ऊपर लेने की बात की जा रही थी लेकिन अब तो जो नयी योजना सामने आई हैं उसके अनुसार अब एअर इंडिया पर महज 18,000 करोड़ रुपये का कर्ज है जब इसके लिए बोली आमंत्रित की जाएगी, तो उसमें खातों में 18,000 करोड़ का कर्ज ही दिखाया जाएगा

118 एयरक्राफ्ट के साथ एयर इंडिया का बेड़ा इंडिगो के बाद दूसरे नंबर पर है। एअर इंडिया के लिए संभावित बिडर्स में टाटा समूह, हिंदुजा, इंडिगो, स्पाइसजेट और कई निजी इक्विटी कंपनियां शामिल हैं. हालांकि माना जा रहा है कि एअर इंडिया की नीलामी में शामिल होने के लिए कई विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों से साझेदारी कर सकती हैं ऐसी ही एक साझेदारी हिंदुजा समूह और अमेरिकी फंड इंटरप्स इंक ने की है और दोनों ने मिलकर एयर इंडिया के लिए संयुक्त रूप से बोली लगाने की निर्णय किया है। खरीद के लिए बोली लगाने वाले के लिए अंतिम तारीख 17 मार्च रखी गई है।

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‘एयरक्राफ्ट रूल्स’ के अनुसार, किसी विमान सेवा कंपनी में विदेशी कंपनी की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती। सरकार कह तो रही है कि एयरलाइन का पर्याप्त स्वामित्व और प्रभावी नियंत्रण एक भारतीय इकाई के पास रहगा लेकिन जब आप 100 प्रतिशत ही हिस्सेदारी बेच रहे हो तो ऐसी शर्तों का कोई मूल्य नही रह जाता

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