भारत की अर्थव्यवस्था भयानक संकट से गुजर रही है भारत में बिजली की डिमांड में पिछले साल की तुलना में इस साल अक्टूबर माह में 13.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी डाटा के मुताबिक यह पिछले 12 सालों की सबसे बड़ी गिरावट है।

साफ दिख रहा है कि उद्योगों की हालत खराब हुई है बिजली की खपत का सीधा संबंध इंडस्ट्रियल सेक्टर में छाई मंदी से है। बिजली की मांग में सबसे ज्यादा कमी जिन राज्यों में देखी गई है। उनमें महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य शामिल हैं, जहां बड़े पैमाने पर कल कारखाने मौजूद है।

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कल सितंबर के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े सामने आए हैं। उसमे भी 12 साल की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गयी है अगस्त में आईआईपी सिकुड़कर 1.1 प्रतिशत रह गया, जो 81 महीनों की सबसे तेज गिरावट है।

जीएसटी संग्रह अक्टूबर महीने में ही लगातार तीसरे महीने 1 लाख करोड़ रुपये से कम आया है।

इस साल की पहली छमाही में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर महज 1.3 फीसदी रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसमें 5.5 फीसदी का इजाफा हुआ था।

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भारतीय अर्थव्यवस्था गहरी मंदी की चपेट में है। और आंकड़े बताते हैं कि निकट भविष्य में तेज सुधार की कोई संभावना नहीं है, बाकी मन्दिर तो बन ही रहा है और सब मंदिर का घण्टा बजाने में लगे हैं इकनॉमी की किसे फिक्र है।

( ये लेख गिरीश मालवीय के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है )

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