जब DHFL ने बीजेपी को 20 करोड़ का चन्दा दिया हो तो उसका तो अधिकार बनता है कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना में मोदीजी की सरकार से 1,880 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी वसूले और 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला करे।

सीबीआई ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) से जुड़े 14,000 करोड़ रुपये के घोटाले का भंडाफोड़ कर दिया। साथ ही इस मामले में आर्थिक संकट में घिरी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटरों कपिल वधावन और धीरज वधावन के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया।

सीबीआई के मुताबिक, कपिल और धीरज ने 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ‘फर्जी व काल्पनिक’ गृह ऋण मंजूर किए।

साथ ही इसके लिए पीएमएवाई के तहत सरकार से 1,880 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी भी हासिल कर ली।कम्पनी के फोरेंसिक ऑडिट के बाद खुलासा हुआ कि कपिल और धीरज ने 2.6 लाख फर्जी गृह ऋण खाते खोले थे।

इनमें से ज्यादातर खाते पीएमएवाई के तहत खोले गए और उन पर नियमों के तहत ब्याज सब्सिडी का दावा किया गया। यह सारा घोटाला मुंबई के बांद्रा स्थित डीएचएफएल शाखा में किया गया।

अब जब आपने अपनी शैल कम्पनियो के जरिए बीजेपी को चांदी की चम्मच से चन्दा चटाया हो तो इतना करना तो वधावन भाइयों का हक बनता ही है।

यह बात कोई आज की नही है यह 2014-15 के ही किस्से है उस वक्त वधावन परिवार और बीजेपी नेताओं के संबंधों की ख़बरें सुर्खियां बनती रहती थी।

डीएचएफ़एल से जुड़ी वधावन परिवार की शैल टाइप की कंपनियों ने जिसमे आर.के.डब्ल्यू डेवलपर्स, स्किल रियल्टर्स व दर्शन डेवलपर्स शामिल हैं उन्होंने बीजेपी को लगभग 20 करोड़ का चंदा दिया था।

वित्तीय वर्ष 2014-15 में आरकेडब्ल्यू डेवलपर्स ने भाजपा को 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया,स्किल रियल्टर्स ने भी इसी साल में बीजेपी को 2 करोड़ रुपये का चंदा दिया, 2016-17 में दर्शन डेवलपर्स ने बीजेपी पर 7.5 करोड़ रुपये लुटाए।

इन कंपनियों का योगदान कंपनी अधिनियम के तहत स्वीकृत राशि से अधिक है. जो धारा 182 में वर्णित है इस धारा में कहा गया है कि एक कंपनी तीन पूर्ववर्ती वित्तीय वर्षों के दौरान अर्जित औसत शुद्ध लाभ का 7.5 प्रतिशत तक ही चंदा राजनीतिक दलों को दे सकती है।

लेकिन इस नियम का उल्लंघन करते हुए यह चन्दा दिया गया खास बात यह है कि तीनों कंपनियों में से किसी ने भी अपनी बैलेंस शीट में भाजपा को दिए चंदे का खुलासा नहीं किया. यह भी नियम के खिलाफ था।

अब वधावन ब्रदर्स को जब चन्दे के रिटर्न में इतने बड़े बड़े घोटाले का अवसर मिल रहा हो तो नियमो की परवाह कौन करता है।

लेकिन DHFL का प्रधानमंत्री आवास योजना में किया गया घोटाला कोई एकमात्र घोटाला नही है। इस कम्पनी को आप देश की सबसे बड़ी घोटालेबाज कम्पनी कहेंगे जब आप नीचे लिखे गए तथ्यों को पढ़ेंगे।

इसी सीबीआई ने पिछले साल जून में यस बैंक से जुड़े घोटाले के मामले में वधावन बंधुओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है यानी यस बैंक को डुबोने में भी DHFL का ही हाथ है।

ईडी ने पिछले साल छापेमारी कर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी इकबाल मिर्ची की मनी लांड्रिंग के केस का खुलासा किया था इसमे भी जिस सनब्लिंक कंपनी का नाम सामने आया है वो DHFL से जुडी हुई है।

DHFL का सीधा संबंध HDIL से भी है जो पीएमसी बैंक घोटाले में आरोपी है. किसी जमाने में HDIL और DHFL दोनों एक ही कंपनियां हुआ करती थी….यानी PMC बैंक जिसमें हजारों खाताधारकों का करोड़ो रुपया फंसा हुआ है वह भी DHFL के ही कारण है।

DHFL में राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) का 24.35 अरब रुपये फंसा है। मार्च, 2019 तक एनएचबी को डीएचएफएल से इतना बकाया कर्ज वसूलना था। एनएचबी आवास वित्त संस्थानों को प्रोत्साहन देने वाली प्रमुख एजेंसी है। अब इसे भी भूल जाइए क्योंकि DHFL तो अब पीरामल की हो गयी है और पुराने सारे कर्जे रफा दफा कर दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (यूपीपीसीएल) के कर्मचारियों के भविष्य निधि की रकम को गलत तरीके से जिस कम्पनी में निवेश किया गया था वह कम्पनी वही DHFL ही है 2017 से अब तक यूपीपीसीएल ने 4,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का रिटायरमेंट फंड हाउसिंग फाइनेंस कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में निवेश किया है। इसमें से यूपीपीसीएल को केवल 1,855 करोड़ रुपये ही मिले हैं, बाकी रकम भूल जाइए।

अब आप ही बताइये कि एक कम्पनी इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करती रही। कोबरा पोस्ट वालो ने 2018 में ही पूरा खुलासा कर दिया था।

यशवंत सिन्हा इसे देश का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला बता रहे थे तब किसी की नींद नही खुली वो तो जब DHFL ने डिफॉल्ट करना शुरु किया तब जाकर मजबूरन उस पर कार्यवाही करनी पड़ी है।

यह है ‘आपके न खाऊँगा न खाने दूँगा’ कहने वाले की असलियत। लेकिन ऐसी कितनी भी असलियत बाहर आ जाए बेशर्म अंधभक्तो को तो शर्म आने से रही।

(यह लेख गिरीश मालवीय की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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