बीते कल यानी 21 जुलाई को आजतक ने एक कार्यक्रम किया, जिसका शीर्षक था “मॉब लिंचिंग की ‘तलवार’ मुसलमान उठाएंगे हथियार!” इस शीर्षक को देखने के साथ ही चैनल के एजंडे को साफ़ तौर पर समझा जा सकता है। चैनल देश में अमन नहीं बल्कि लोगों को भड़काकर हिंसा को बढ़ावा देने चाहता है!

दरअसल, आजतक ने यह कार्यक्रम मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ मुस्लिम धर्मगुरू कल्बे जवाद के एक बयान को लेकर किया था। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना कल्बे जवाद ने मुसलमानों, दलितों और शोषितों से अपील की थी कि वे आत्मरक्षा के लिए हथियार खरीदें।

उन्होंने इसके लिए 26 जुलाई को लखनऊ में एक कैंप के आयोजन का भी ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि इस कैंप के ज़रिए लोगों को बताया जाएगा कि वह सरकार से हथियार कैसे लें और इसके लिए कैसे आवेदन करें।

हालांकि उन्होंने यह साफ़ कहा था कि उनके कैंप में हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी। लेकिन इसके बावजूद ज़्यादातर चैनलों-अख़बारों ने इस बयान को ग़लत तरीके से पेश किया और ख़बर चलाई कि कैंप में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

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आजतक ने भी अपने कार्यक्रम के ज़रिए मौलाना कल्बे जवाद के इस बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और पीड़ित मुसलमानों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। चैनल ने यह स्थापित करने की कोशिश की कि मुसलमान अब मॉब लिंचिंग का जवाब हथियार से देंगे। जबकि बयान में कहीं भी हथियार चलाने का ज़िक्र नहीं था।

अब सवाल यह उठता है कि चैनल ने ऐसा क्यों किया? क्या चैनल के इस कार्यक्रम से समाज में नफ़रत को और बढ़ावा नहीं मिलेगा? ऐसे वक़्त में जब मॉब लिंचिंग भारत के लिए एक अभिषाप बन चुकी है, तो क्या चैनल की ज़िम्मेदारी नहीं है कि वह मुखर होकर इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाए। सरकार से पूछे कि इसे रोकने के लिए वह क्या कदम उठा रही है।

लेकिन चैनल अपनी ज़िम्मेदारी को निभाने की बजाए जो लोग मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हीं को कटघरे में खड़ा कर रहा है। हथियारों की ट्रेनिंग की फर्ज़ी ख़बर चलाकर लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहा है।

रतनेश यादव ने आजतक के इस कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हुए चैनल के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए जाने की मांग की है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट के ज़रिए कहा,  “इसपर हिंसा फैलाने का केस दर्ज होना चाहिये। हिन्दू देवी देवताओं के नाम पर हत्या करने वालों पर बहस न करके जो प्रताड़ित हो रहा है उसे ही कठघरे में खड़ा करने की साज़िश चल रही है”।

इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने आजतक के मालिक अरुण पुरी से सवाल करते कई ट्वीट किए।

उन्होंने लिखा कि, ये करके TRP मिल गई, दो पैसे ज्यादा कमा लिए, एक प्रमोशन एक्सट्रा लग गया, कंपनी बड़ी हो भी गई तो भी क्या. पत्रकारिता जब लोकतत्र और नैतिकता के बुनियादी सिद्धांतों से हट गई तो फिर सीधे जहर ही बेच लिया जाए. शर्मनाक

उन्होंने अरुण पुरी से पूछा कि, क्या ये सबकुछ आपकी सहमति से हो रहा है ?

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