हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर उत्तर प्रदेश पंजाब और हरियाणा से आए किसानों ने ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन के तहत सरकार के इस सशर्त बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। किसानों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती। तब तक मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।

इसी बीच कल भारतीय किसान यूनियन के महासचिव जगमोहन सिंह ने सिंघु बॉर्डर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा है कि देशभर के किसान पीएम मोदी से नाराज हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे आंदोलन को खत्म करने के लिए 30 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। यह लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं बल्कि सब की है। यह सरकार कॉरपोरेट्स द्वारा और उनके लिए ही चलाई जा रही है।

जबकि देश की जनता का शोषण भी कॉर्पोरेट ही कर रहे हैं। हम ये लड़ाई सिर्फ किसानों के लिए नहीं, मजदूरों और मेहनत करने वाले गरीब वर्ग के लिए लड़ रहे हैं।

देश के प्रधानमंत्री का अपने ही मन की बात बोल रहे हैं। हमें ये बिलकुल भी मंजूर नहीं है। उन्होंने ‘मुंह में राम बगल में छुरी’ की कहावत सच कर दिखाई है। किसानों को रोकने के लिए बीएसएफ के जवानों को तैनात किया गया है।

गृह मंत्री अमित शाह हमारे कई लीडरों के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

इस दौरान किसानों ने मोदी सरकार को तानाशाह करार दिया। हम इस बार मोदी सरकार की किसी भी जाल में फंसने वाले नहीं है, ना ही हम पीछे हटने वाले हैं। हम यहां पर डटकर विरोध करेंगे और इससे आगे भी बढ़ेंगे।

किसानों का कहना है कि हम भाजपा की मोल-तोल वाली शर्तों को स्वीकार करने से इंकार करते हैं।

किसानों ने चेतावनी देते ये कहा है कि अगर मोदी सरकार उनकी चिंताओं पर विचार नहीं करती तो हुए उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हम 7 साल से पीएम मोदी की बात सुन रहे हैं, अब हमारी बात सरकार को सुननी होगी।

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