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बीजेपी और शिवसेना के बीच चल रहे विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है। शिवसेना ने एनडीए के साथ अलग होने का ऐलान कर दिया है। शिवसेना ने कहा कि 2019 का चुनाव वह अकेले लड़ेगी और साथ ही साथ विधानसभा का चुनाव भी अकेले ही लड़ेगी।

गौरतलब है कि शिवसेना और बीजेपी के बीच पिछले काफी समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हाल ही में ज़िला परिषद् चुनाव में भी शिवसेना ने ठाणे सीट पर बीजेपी को छोड़ एनसीपी से हाथ मिला लिया था।

इस फैसले की उम्मीद पहले से थी क्योंकि शिवसेना लगातार जीएसटी, नोटबंदी और एफडीआई को लेकर केंद्र सरकार पर हमला कर रही थी। इसके अलावा शिवसेना की ओर कई बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ भी की जा चुकी है।

महाराष्ट्र सरकार के अलावा बीएमसी में दोनों पार्टियां गठबंधन करके सरकार चला रही हैं। शिवसेना ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है जब युवा नेता और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी की नैशनल एक्जीक्यूटिव का सदस्य बनाया गया है। इसे शिवसेना की विरासत अगली पीढ़ी को सौंपने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। बता दें, कि शिवसेना ने यह फैसला अपनी कार्यकारिणी की बैठक में लिया है।

इस फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति पर बड़ा असर पड़ने वाला है। महारष्ट्र में अब बीजेपी के हाथ से चीज़े जा रही है। फडणवीस सरकार पर इस बीच कई भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। भीमा कोरेगांव हिंसा के बाद राज्य में दलितों की ओर से भाजपा विरोधी माहौल बना है।

केंद्र में भी मोदी सरकार रोज़गार, अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर विरोध झेल रही है। शायद शिवसेना इस माहौल को माकूल समझ रही है और वक़्त रहते बीजेपी से किनारा कर लेना चाहती है।

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