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लोकसभा चुनाव अपने दूसरे चरण चुनाव तक आ पहुंचा है। इस बार चुनाव में एक तरफ जहां सबकी नज़र केंद्र की सत्ता पर है तो वहीं दूसरी नज़र उन सीटों पर जहां बीजेपी ने अच्छे अंतर से जीत हासिल की थी। जिनमें एक सीट है मथुरा जिसपर पहले राष्ट्रीय लोकदल का कब्ज़ा था मगर पिछली बार हुए लोकसभा चुनाव में अभिनेत्री हेमा मालिनी ने यहां से जीत दर्ज की थी।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार अयोध्या को राम की नगरी, वाराणसी को शिव की नगरी और मथुरा को कृष्ण की नगरी के रूप में देखा जाता है।

साथ ही अगर मथुरा राजनीतिक इतिहास से भी देखा जाये तो वो भी कोई आम नहीं रही है। पिछली बार जहां हेमा मालिनी यहां से चुनाव लड़ा था वहीं इससे पहले साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी की मदद से राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी भी यहां से एकतरफा बड़ी जीत दर्ज की।

ये पहली बार नहीं है जब मथुरा लोकसभा चुनाव में खूब सुर्खिया बटोर रहा हो। आज़ादी के बाद हुए लोकसभा के पहले और दूसरे लोकसभा चुनाव में यहां से निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद धीरे धीरे यहां पर कांग्रेस ने अपने पैर ज़माने शुरू किये सन 1962 से 1977 तक तीन बार कांग्रेस पार्टी ने यहां से लगातार जीत दर्ज तो की थी।

मगर आपातकाल नाराज़ मथुरा के लोगों ने कांग्रेस को बाहर रास्ता दिखा दिया। सत्ता विरोधी लहर में भारतीय लोकदल ने जीत हासिल की। इसके बाद सन 1980 में जनता दल यहां से चुनाव जीता, मगर इंद्रा गांधी की हत्या के बाद मथुरा ने भी भावुक होकर सन 1984 में एक बार फिर कांग्रेस को चुन लिया।

मगर इस जीत के बाद कांग्रेस को मथुरा लोकसभा सीट हासिल करने में 20 साल लग गए। सन 1989 में जनता दल के प्रत्याशी ने यहां मानवेन्द्र सिंह जीत दर्ज की। इसके बाद यहां लगातार 1991 में स्वामी साक्षी, और फिर चौधरी तेजवीर सिंह ने यहां पर बीजेपी को मजबूत करने की कोशिश की।   चौधरी तेजवीर सिंह मथुरा से तीन बार चुने गए सन 1996,98 और 1999 में वो सांसद रहें।

फिर कांग्रेस ने साल 2004 में 20 साल बाद जीत तो दर्ज की मगर साल 2009 के बीजेपी के साथ लड़ी रालोद के जयंत चौधरी ने यहां से जीत दर्ज की इसके बाद हुए साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कथित मोदी लहर के दम पर अभिनेत्री हेमा मालिनी ने 50 फीसदी से अधिक वोट पाकर बीजेपी के टिकट पर ये चुनाव जीता।

रालोद को महागठबंधन का होगा फायदा?

इस बार के लोकसभा चुनाव सबकी नज़र यूपी पर ज्यादा है। क्योंकि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने बड़ी ताकत बनकर उबरी थी। बीजेपी ने यूपी 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

जिनमे मथुरा की लोकसभा सीट भी शामिल थी जहां जयंत चौधरी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा और हेमा मालिनी को राष्ट्रीय लोकदल ने जबकि जयंत चौधरी को एक बार फिर यहां करारी हार का सामना करना पड़ा।

हेमा मालिनी ने जहां 53.29 फीसद के साथ 5,74,633 वोट मिले वहीं 22.62 फीसदी के साथ उन्हें 2,43,890 वोट मिले, वहीं बसपा तीसरे पर तो सपा चौथे नंबर रही थी।

इस बार रालोद महागठबंधन का हिस्सा है और उम्मीद ये की जा रही है की सपा-बसपा के सहारे हैण्डपम्प मजबूत है। रालोद ने इस बार जयंत चौधरी को ना उतारकर पूर्व में सांसद रहे कुंवर मानवेंद्र सिंह के छोटे भाई कुंवर नरेन्द्र सिंह को टिकट दिया। वो इससे पहले साल 2017 में विधानसभा चुनाव में  मथुरा की गोवर्धन विधानसभा का चुनाव लड़ चुके है। वहीं कांग्रेस ने महेश पाठक को मैदान में उतारा है, इस सीट पर बीजेपी को कांग्रेस और महागठबंधन से सीधे टक्कर लेनी है।

जाट बनाम जाट की लड़ाई

मीडिया की तमाम रिपोर्ट्स की माने तो यहां की लड़ाई अब जाट बनान जाट होती जा रही है। हेमा मालिनी के लिए रैली करने पहुंचे उनके पति धर्मेंद्र भी जाट वोटों पर दावा ठोक चुके हैं। वहीं कुंवर नरेन्द्र सिंह भी जाट वोटबैंक पर सेंध लगाने के लिए तैयार है।

ऐसे में कहा ये भी जा रहा है की यहां लड़ाई सिर्फ बीजेपी और महागठबंधन(सपा-बसपा-रालोद) में है वहीं कांग्रेस अपनी सियासी ज़मीन तलाश रही है। जाट बनाम जाट की लड़ाई मतलब बीजेपी बनाम महागठबंधन है।

जहां एक तरफ हेमा मालिनी अपने पति और सुपरस्टार धर्मेन्द्र प्रचार करवा रही जो  खुद जाट हैं और वहीं महागठबंधन को अपनी एकता पर भरोसा तो है मगर उन्होंने एक जाट को टिकट देकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इस सीट पर जाट और मुस्लिम वोटरों का वर्चस्व रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी जाट और मुस्लिम वोटरों के अलग होने का नुकसान रालोद को ही भुगतना पड़ा था। जाटों ने एकमुश्त होकर बीजेपी के हक में वोट किया। मगर इस बार हालत दूसरे है महागठबंधन यहां मजबूत है और बीजेपी उम्मीदवार अपने स्टारडम के बदौलत एक बार फिर से चुनावी मैदान में है।

अब देखना ये होगा कि 5 विधानसभा वाली मथुरा सीट पर जहां कुल 17 लाख मतदाता हैं, जिनमें 9.3 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला वोटर हैं। वो जनता किसपर भरोसा जताते है क्योंकि साल 2017 के हुए विधानसभा चुनाव में मथुरा की मांट सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने जीत हासिल की थी, वहीं बाकी 4 सीटों पर बीजेपी खातें में गई थी।

बंदरों की समस्या

मथुरा पिछले दिनों तब चर्चा में आया था जब सीएम योगी आदित्यनाथ से लोगों ने बंदरों की समस्या को लेकर शिकायत की थी। इसपर योगी ने जवाब देते हुए कहा था कि वो परेशान करते है तो उनकी आरती उतारो या हनुमान चालीसा पढ़ो वो चले जायेंगें। मथुरा में तमाम विकास के बावजूद लोगों को अब भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सबसे प्रमुख समस्या बंदरों की हैं। बंदर लोगों को रास्ते मे रोक समान छीन ले जाते है। पलक झपकते ही तीर्थ यात्रियों का सामान झपट लेते हैं। कीमती सामान वह तभी लौटाते हैं जब इन्हें कुछ खिलाया जाए। ऐसे में मथुरा में समस्याएँ तो छोटी छोटी है मगर धीरे धीरे इतनी बड़ी हो गई है की उसका निवारण करने मौजूदा सांसद हेमा मालिनी असफल रहीं है।