लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने से पहले राजनैतिक गलियारे में ईवीएम और वीवीपैट पर काफी हो-हल्ला मचा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो स्ट्रोंग रूम्स के आसपास ईवीएम की बरामदगी, ट्रकों, निजी वाहनों और होटल में मिले ईवीएम पर विपक्ष पार्टियां चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है।

कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय पार्टी नेता का कहना है कि देश के कई हिस्सों में स्ट्रांगरूम से ईवीएम स्थानांतरित किए जाने की शिकायतों पर चुनाव आयोग को तत्काल प्रभावी कदम उठाना चाहिए।

वही इस ईवीएम फेरबदल में देश के जाने माने वकील और पूर्व आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने चिंता ज़ाहिर किया है। प्रशांत भूषण ने कहा कि डर ईवीएम की हैकिंग को लेकर नहीं बल्कि उसके बदले जाने (स्वैपिंग) को लेकर है।

उन्होंने ट्वीट कर ईवीएम बदले जाने को लेकर कहा तथाकथित रिजर्व ईवीएम को लेकर जो असामान्य तरीके अपनाए जा रहे हैं वो पक्षपातपूर्ण है और उसकी सुरक्षा को लेकर समझौता किया जा रहा है।

जिस ईवीएम का चुनाव के लिए इस्तेमाल हो रहा है उसके बदले जाने का डर है’। इसी क्रम में आज 22 विपक्षी दलों के साथ चंद्रबाबू नायडू भी चुनाव आयोग से मिलने जायेंगे।

वही इस मामले में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, चंदौली में ईवीएम की सुरक्षा को लेकर कई दलों ने सवाल उठाए है। गाजीपुर से महागठबंधन के प्रत्याशी अफजाल अंसारी ने ईवीएम बदलने का आरोप लगाया था और इसको लेकर धरने पर बैठ गए थे।

एग्जिट पोल आने के बाद यह समान्य बात नहीं है की अनेक जगहों से ईवीएम हटाने और लाने की घटनाएँ हो रही है। ऐसी अलग-अलग इलाकों से लोग ऐसी घटनाओं के  वीडियो रिकॉर्ड कर रहे है। आखिर जहाँ मशीनें रखी गयीं है वहां और मशीनें लाने या ले जाने की जरूरत क्या है? इसपर चुनाव आयोग अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।

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