तीनों कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को अब मध्य प्रदेश में भी लाए जाने की घोषणा की गई है। 8 मार्च को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार को घेरने के लिए पहुंचने वाले हैं।

वहीं पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में राकेश टिकैत और संयुक्त किसान मोर्चा की एंट्री ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।

दरअसल संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में किसान महापंचायतों का आयोजन करने की घोषणा की है।

जिसके तहत देशभर के किसानों को जागरूक किया जाएगा। इसी कड़ी में संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने पश्चिम बंगाल में भी महापंचायतों में शामिल होने की बात कही है।

गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में किसान लगातार मोदी सरकार को घेरने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।

राज्य में होने वाले मतदान से ठीक 2 हफ्ते पहले संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत पश्चिम बंगाल में किसान महापंचायत का आयोजन कर इन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को जागरूक करेंगे। जो कि भारतीय जनता पार्टी के लिए मुसीबत बन सकता है।

भले में किसान आंदोलन राजनीति से बिलकुल अलग है। लेकिन पश्चिम बंगाल में होने वाली किसान महापंचायतें होने से उसके सियासी मायने बदल सकते हैं।

माना जा रहा है कि अगर किसान नेता राकेश टिकैत पश्चिम बंगाल में किसान महापंचायत करते हैं। तो यह ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। जिसके लिए चुनाव आयोग ने 8 चरणों में मतदान करवाना तय किया है। पहले चरण के लिए मतदान 27 मार्च से शुरू होने वाला है।

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