जिस पश्चिम बंगाल चुनाव के नाम पर भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग और मीडिया ने देश को महामारी की भारी मुसीबत में डाल दिया,

अब उसी पश्चिम बंगाल में भाजपा हार रही है। तमाम कोशिशों के बाद ममता बनर्जी की सरकार तीसरी बार आ रही है वो भी एक बड़े बहुमत के साथ।

खबर लिखे जाने तक शुरुआती 5 घंटे में तृणमूल कांग्रेस ने 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है जबकि भाजपा मात्र 88 सीटों पर लीड कर रही है। लेफ्ट और कांग्रेस का और बुरा हाल है। खाता खोलने के लिए जूझ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे आते ही भाजपा के बड़े-बड़े दावे मजाक बन चुके हैं। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस को जीत की शुभकामनाएं मिलनी शुरू हो गई हैं।

इस चुनाव में ममता बनर्जी को मजबूती देने के लिए अपना समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने न सिर्फ चुनाव में जीत के लिए तृणमूल कांग्रेस को बधाई दी है बल्कि भाजपा की हार को नफरत का अंत बताया है।

सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव लिखते हैं – “प. बंगाल में भाजपा की नफ़रत की राजनीति को हराने वाली जागरुक जनता, जुझारू सुश्री ममता बनर्जी जी व टीएमसी के समर्पित नेताओं व कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई!

ये भाजपाइयों के एक महिला पर किए गए अपमानजनक कटाक्ष ‘दीदी ओ दीदी’ का जनता द्वारा दिया गया मुँहतोड़ जवाब है। # दीदी_जिओ_दीदी”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने घोषणा की थी कि वो पश्चिम बंगाल में चुनाव न लड़कर तृणमूल कांग्रेस को समर्थन देंगे।

इसी तरह राष्ट्रीय जनता दल और शिवसेना जैसे अन्य दलों ने भी तृणमूल कांग्रेस को समर्थन दिया था हालांकि वामदलों ने और कांग्रेस ने अलग चुनाव लड़ा मगर न वो जीतने की स्थिति में दिखे और न ही कोई असर डालने की स्थिति में।

पश्चिम बंगाल में 35 साल तक शासन करने वाले लेफ्ट और उसके बाद सबसे ज्यादा शासन करने वाली और सबसे ज्यादा वक्त विपक्ष में रहने वाली कॉन्ग्रेस का लगभग सूपड़ा साफ हो गया है 1-2 सीटों को छोड़कर लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन कहीं पर टक्कर देती हुई दिखाई नहीं दे रही है।

इसे तृणमूल और भाजपा दोनों के लिए जीत के रूप में देखा जा सकता है कि ममता बनर्जी की सत्ता भी बनी रही और विपक्ष के रूप में भाजपा स्थापित हो गई।

तो पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों को तृणमूल या भाजपा की हार से कहीं ज्यादा प्रमुख विपक्षी दल रहे लेफ्ट और कांग्रेस के हार के रूप में देखा जाना चाहिए।

अभी जो नतीजे आ रहे हैं उससे कहीं न कहीं चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की बात सही साबित हो रही है कि भारतीय जनता पार्टी 3 अंकों में नहीं पहुंच सकेगी यानी 100 का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाएगी।

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