बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि इस बार सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा क्या होगा।

जहां सत्ताधारी जेडीयू इस बात का प्रचार करवा रही है कि ‘ठीके तो हैं नीतीश कुमार’ वहीं प्रमुख विपक्षी दल आरजेडी पूछ रही है कहां हैं रोजगार?

यानी प्रमुख विपक्षी दल के तेवर से लग रहा है कि बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है।

इसी कोशिश के तहत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि लाखों लोग रोजगार मांग रहे हैं।

अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तमाम बातों को फेसबुक पर शेयर करते हुए तेजस्वी यादव लिखते हैं-

‘हमारी सरकार बनने पर पहली कैबिनेट में पहली ही कलम से बिहार के 10 लाख युवाओं को स्थायी नौकरी देंगे।

राजद द्वारा विगत 5 सितंबर को लॉंच बेरोज़गारी हटाओ पोर्टल पर अब तक 9 लाख 47 हज़ार 324 बेरोज़गार युवाओं और 13 लाख 11 हज़ार 626 लोगों ने टोल फ़्री नम्बर पर Missed Call किया यानि अब तक कुल 22 लाख 58 हज़ार 950 लोगों ने निबंधन किया है।

बिहार में 4 लाख 50 हज़ार रिक्तियाँ पहले से ही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह विभाग सहित अन्य विभागों में राष्ट्रीय औसत एव तय मानकों के हिसाब से बिहार में अभी भी 5 लाख 50 हज़ार नियुक्तियों की अत्यंत आवश्यकता है।

उदाहरण के तौर पर स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तय मानक पर बिहार आख़री पायदान पर है। बिहार की आबादी लगभग साढ़े बारह करोड़ है। WHO के स्वास्थ्य मानक के अनुसार प्रति 1000 आबादी एक डॉक्टर होना चाहिए लेकिन बिहार में 17 हज़ार की आबादी पर एक डॉक्टर है।

इस हिसाब से बिहार में एक लाख पचीस हज़ार डॉक्टरों की ज़रूरत है। उसी अनुपात में सपोर्ट स्टाफ़ जैसे नर्स,लैब टेक्निशियन, फ़ार्मसिस्ट की ज़रूरत है।सिर्फ़ स्वास्थ्य विभाग में ही ढाई लाख लोगों की ज़रूरत है।

राज्य में पुलिसकर्मियों के 50 हजार से अधिक पद रिक्त हैं. यह तब है जब बिहार में पुलिस-पब्लिक का अनुपात न्यूनतम स्तर पर पहुंचा हुआ है, यहां प्रति एक लाख की आबादी पर सिर्फ 77 पुलिस कर्मी हैं, जबकि मणिपुर जैसे राज्य में पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख की आबादी पर एक हजार से अधिक है। राष्ट्रीय औसत 144 पुलिसकर्मी प्रति एक लाख आबादी पर है।

बिहार में पुलिसकर्मियों की टोटल स्ट्रैंथ की 1.26 लाख है लेकिन अभी सिर्फ 77 हजार कार्यरत पुलिस कर्मियों के भरोसे इतना बड़ा और अपराध की दृष्टि से गंभीर माना जाने वाल राज्य चल रहा है. अभी पुलिस विभाग में लगभग 50 हज़ार रिक्तियाँ है। राष्ट्रीय औसत से भी देखें तो बिहार में 1.72 लाख पुलिसकर्मियों की ज़रूरत है। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों की नियुक्ति में आनाकानी चलती रहती है और आज तक बहाली की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।

शिक्षा क्षेत्र में 3 लाख शिक्षकों की ज़रूरत है। प्राइमरी और सेकंडेरी लेवल पर ढाई लाख से अधिक स्थायी शिक्षकों की पद रिक्त है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर लगभग 50 हज़ार प्रोफ़ेसर की आवश्यकता है। बिहार में 35 हज़ार के लगभग ऐसे विद्यालय हैं जहाँ एक ही शिक्षक हैं। बिहार के 67.94 ऐसे प्राइमरी स्कूल हैं जहाँ विद्यार्थी शिक्षक अनुपात अस्वीकार्य स्थिति में है। इसके ऊपर के विद्यालयों की स्थिति और भी बदतर है। 77.86 माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थी शिक्षक अनुपात बिल्कुल आपत्तिजनक अवस्था में है।

राज्य में जूनियर इंजीनियर के 66% पद ख़ाली हैं।

पथ निर्माण, जल संसाधन, भवन निर्माण, बिजली विभाग तथा अन्य अभियांत्रिक विभागों में लगभग 75 हज़ार अभियंताओं की ज़रूरत है।

इसके अलावा लिपिकों, सहायकों, चपरासी और अन्य वर्गों के लगभग 2 लाख पद भरने की आवश्यकता है ताकि काम-काज सुचारू रूप से चल सके और कार्य में निपुणता और गुणवता आ सके।

हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता रिक्तियों के साथ-साथ नयी नौकरियाँ सृजित करने की होगी। इसके लिए हम वचनबद्ध हैं। हमारी पहली कैबिनेट बैठक में इन पदों को भरने की क़वायद शुरू होगी, विज्ञापन निकाला जाएगा और एक तय समय सीमा के नियुक्तियाँ की जाएँगी।’

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के मुताबिक इस सरकार का वर्तमान कार्यकाल अधिकतम 2 महीने और चल सकता है। क्योंकि 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को तीन चरणों में मतदान होने हैं और 10 नवंबर को चुनावी नतीजे आ जाएंगे।

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