nitish kumar
Nitish Kumar

नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पास होने के बाद बुधवार को राज्यसभा में भी पास हो गया। बता दें की सरकार के नागरिकता संशोधन बिल को लेकर एक ओर जहां देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं इस बिल का दोनों सदनों में समर्थन देने पर जेडीयू की काफी आलोचना हो रही है।

जेडीयू के इस बिल का समर्थन करने को लेकर विपक्ष के नेताओं के साथ साथ खुद उनकी पार्टी के कुछ नेता नीतीश कुमार और पार्टी को धर्मनिरपेक्षता की याद दिला रहें हैं। वहीं जेडीयू ने यह स्पष्ट किया है कि नागरिक संशोधन बिल धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ नहीं हैं।

बता दें की नीतीश कुमार अपनी पार्टी को सेक्युलर छवि का बताते आये हैं। लेकिन हाल के दिनों में पार्टी ने ट्रिपल तलाक या धारा 370 हटाने के फैसलों का अपने तरीके से विरोध किया पर वो कहीं नजर नहीं आया। लेकिन नागरिकता संशोधन बिल पर पहली बार जेडीयू ने लोकसभा में खुलकर इसका समर्थन किया है। जेडीयू के इस कदम के बाद क्या यह माना जाए कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी की सेक्युलर छवि में बदलाव करने जा रहे हैं।

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बता दे की जब 2013 में बीजेपी से अलग होने के बाद जेडीयू अकेले दम पर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा। जहाँ नितीश कुमार को तगड़ा झटका लगा और जेडीयू 2 सीटों पर सिमट कर रह गयी थी। उसके बाद नीतीश कुमार 2015 विधानसभा में राजद, कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा का चुनाव लड़ा जहां इस महागठबंधन को भारी बहुमत से जनता ने जिताया। और नीतीश कुमार फिर तीसरी बार बिहार के सीएम बने। लेकिन डेढ़ साल बाद फिर बीजेपी के साथ मिलकर महागठबंधन से अलग हो गए। जिसके बाद विपक्ष उनपर पल्टी मारने का आरोप लगते रहा है।

अभी ताजा मामला इस नागरिक संशोधन बिल को जेडीयू ने समर्थन किया है। जिसके बाद बिहार की प्रमुख विपक्ष पार्टी राजद और कई अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े नेता और सामाजिक कार्यकर्ता नीतीश कुमार पर उनके साथ धोखेबाज़ी का आरोप लगया है।

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जहाँ राजद के नेता और प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने ट्वीट कर कहा- ‘नीतीश कुमार ने भारत के संविधान और भारत के गंगा,जमनी तहज़ीब को ध्वस्त करने वाला CAB काला कानून का समर्थन कर एक फिर सिद्ध कर दिया वे RSS,BJP और गोड्सेवादी है’।

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