बिहार में एक बार फिर से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे हैं। लेकिन भाजपा ने बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी का पत्ता साफ कर दिया है।

यानी कि भाजपा ने इस बार राज्य का उपमुख्यमंत्री पद सुशील कुमार की जगह किसी अन्य नेता को देने का फैसला लिया है।

बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब भाजपा ने जदयू से ज्यादा सीटें हासिल की। लेकिन एनडीए ने नीतीश कुमार को ही दोबारा मुख्यमंत्री पद के लिए चुना। तो उपमुख्यमंत्री पद सुशील मोदी को क्यों नहीं दिया है।

दरअसल बिहार की सत्ता में नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी को राम-लक्ष्मण की जोड़ी की तरह देखा जाता है।

विपक्षी पार्टियों ने इस मामले में एनडीए और सुशील मोदी की जमकर चुटकी ली है। इंडियन यूथ कांग्रेस के नेता श्रीनिवास बी वी ने ट्वीट किया है।

उन्होंने इस ट्वीट में लिखा है कि “19 लाख युवाओं को रोजगार का वादा करके, सुशील मोदी अब खुद बेरोजगार बन चुके है.. निर्मला जी, अब आप ही बता दीजिए:- फ्री वैक्सीन और 19 लाख युवाओं को रोजगार कब और कैसे मिलना शुरू होगा ?”

गौरतलब है कि बिहार चुनाव से कुछ वक्त पहले ही सुशील मोदी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। जिसके चलते वह कुछ दिन अस्पताल में रहे।

अस्पताल से निकलकर सीधे सुशील मोदी ने एक बड़े यह रोड शो का आयोजन किया। जिसमें उन्होंने बिहार के युवाओं से 19 लाख रोजगार देने का वादा किया।

दरअसल एनडीए ने ये वादा महागठबंधन की तर्ज पर किया था। महागठबंधन की तरफ से राजद नेता तेजस्वी यादव ने ये दावा किया था कि अगर राज्य में उनकी सरकार बनती है तो 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी

वहीँ देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि अगर बिहार में दोबारा एनडीए की सरकार बनती है। तो बिहार के लोगों को फ्री में कोरोना वैक्सीन दी जाएगी। जिसपर काफी बवाल हुआ था।

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