बिहार में हर साल दिमागी बुखार के चलते कई बच्चों की जान चली जाती है। इस साल भी यहाँ बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। मुजफ्फरपुर जिले में दिमागी बुखार के चलते एक हफ्ते में 56 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। यही नहीं पिछले 24 घंटो में 6 मासूमो ने दम तोड़ दिया है।

‘बिहार में बहार है क्योंकि नीतीश कुमार है’ कहने वालो की सरकार मासूम बच्चों की जान बचाने में नाकाम साबित हो रही है। बीते रविवार को 12 घंटे के अंदर दिमागी बुखार के 23 मामले में सामने आए जिसमें 3 मरीजों की मौत हो गई जिनमे से 2 की मौत तो अस्पताल लाते वक़्त ही हो गई थी।

बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी और वैशाली में दिमागी बुखार का कहर कई मासूमों की जान ले चुका है। इस हालत को देखते हुए सभी डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया गया है।

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इस मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में बच्चों की बढ़ती मौतों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम को स्थिति की निगरानी करने और AES के बारे में जटिलताओं और निवारक उपायों के बारे में जागरूकता अभियान को गति देने के लिए मुजफ्फरपुर भेजा गया है।

नीतीश कुमार ने कहा कि ऐसा लगता है कि लोगों में जानकारी और जागरूकता की कमी है कि इस बीमारी से कैसे निपटा जाए। ऐसा लगता है कि पिछले दो वर्षों में मामलों की संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन इस बार यह एक बार फिर हिट हुआ है। जागरूकता अभियान ठीक से नहीं किया गया था। उन्होंने लोगों में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि वे अपने बच्चों को खाली पेट सोने न दें।

केंद्र सरकार ने भी एक विशेषीकृत उच्च-स्तरीय टीम का गठन किया है जो मुजफ्फरपुर में एक्यूट एंसेफलाइटिस (एईएस) और गया में जापानी एंसेफलाइटिस (जेई) के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने में राज्य सरकार की मदद करेगी।

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वही श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) मुजफ्फरपुर के अधीक्षक सुनील शाही ने कहा जनवरी से 2 जून तक 13 रोगियों को भर्ती किया गया था, उनमें से 3 की मृत्यु हो गई। 2 जून से इस दिन तक 86 लोगों को भर्ती किया गया था, जिनमें से 31 की मौत हो गई।’ जिले के निजी और सरकारी अस्पतालों में अधिकांश वार्ड बच्चों से भरे हुए हैं, ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।

गौरतलब हो कि दिमागी बुखार में पहले तेज बुखार आता है इसके बाद शरीर में ऐंठन होती है। इसके बात धीरे-धीरे बिना किसी बात के भ्रम उपन्न हो जाता है। इसके अलावा मांसपेशियों में कमजोरी, बोलने सुनने मे समस्या और बेहोशी छाना भी दिमागी बुखार के लक्षण हैं।