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अमेरिका में राष्ट्रपति का पहला साल अक्सर उपलब्धियों से भरा होता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है क्योकिं बीतें 23 साल में 4 राष्ट्रपतियों में ट्रम्प सबसे ज्यादा नापसंद किये जाने वालें राष्ट्रपति बने है।

लोगों की राय के अनुसार, ट्रम्प के ये 12 महीने बहुत निम्न स्तर के रहे। जहां ट्रम्प के कामकाज को लेकर 39 प्रतिशत रेटिंग दी गई है वहीँ उनसे पहले प्रेसिडेंट रहें ओबामा को 50 फीसद तक की बढ़त मिल चुकी है।

दरअसल 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रम्प ने बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति एक साल पूरा किया है। ट्रम्प ने चुनाव के वक़्त पीएम मोदी के तर्ज पर बड़े बड़े वादे किये थे की वो देश की राजनीति को बदल देंगें। यहां तक की उन्होंने इंडिया फर्स्ट की तरह ही अमेरिका फर्स्ट का नारा दिया था। मगर पिछले एक साल में क्या क्या हुआ इसका खुलासा किया है रिसर्च एजेंसी गैलप ने, जिसमें बताया गया है की ओबामा न ही सिर्फ ट्रम्प से बेहतर प्रेसिडेंट थे।

वही उनके रहते अमेरिका का दुनियाभर में दबदबा भी रहा। अमेरिका में भारत की ही तरह राजनीतिक माहौल लगातार बदतर और कटुतापूर्ण होते दिखाई दे रहा है। लोगों ने कई बार सोशल मीडिया पर ट्रम्प का प्रेसिडेंट बनने की तुलना जबरन कराई गई शादी से भी की है।

वहीँ उनकी अपनी पार्टी यानी की रिपब्लिकन नेताओं को लगता है कि ट्रम्प ने पार्टी को बड़ी जीतें दिलाई हैं। इससे नए वोटर जुड़े हैं। पुराने विरोधी भी अब उनके साथ काम करने की इच्छा जताने लगे हैं। लेकिन पार्टी को यह अंदेशा भी है कि इस साल नवंबर में उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

बीते महीने दिसंबर में हुए एक सर्वे की माने तो साल 2018 में 38 फीसदी मतदाताओं के ही रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में मत देने की संभावना है। मगर डोनाल्ड ट्रम्प ‘मुझे फर्क नहीं पड़ता’ वालें मूड में नज़र आतें है।

ट्रम्प को एक साल और अमरीका बंदी

बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अमरीका में नया बजट सीनेट में पास नहीं हो पाया है जिसके बाद प्रशासन ने सरकारी कामकाज बंद होने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रवासियों और सीमा सुरक्षा पर भारी विवाद के कारण इस बिल को ज़रूरी 60 वोट नहीं मिल पाए हैं। संघीय सरकार को मिलने वाले फंड की ख़ातिर इस बिल को 16 फ़रवरी तक पास होना ज़रूरी है।

ये पहला मौक़ा है जब रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस में बहुमत है और व्हाइट हाउस में भी उसी का दख़ल है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के कार्यालय ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर आरोप लगाया है कि “वो बेतुकी मांगों के ज़रिए देश के नागरिकों के लिए मुसीबतें खड़ी कर रही है।