उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होने लगी है। सत्ताधारी भाजपा का दावा है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून का राज लागू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगल-अलग मंच से लगातार योगी सरकार के कार्यकाल की तारीफ कर रहे हैं और इस दौरान ‘दुरुस्त कानून व्यवस्था’ की चर्चा करना नहीं भूल रहे।

हालांकि ज्यादातर आंकड़े मोदी और योगी के दावों ठीक उलट हैं। चाहे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा का मामला हो, मानवाधिकार का मामला हो, हिरासत में मौत का मामला हो, नागरिक अधिकारों के हनन का मामला हो… योगी सरकार असफल नजर आ रही है।

एक ताजा आंकड़ा धारा-144 से जुड़ा सामने आया है। दरअसल, विधान परिषद में कांग्रेस MLC दीपक सिंह ने यह सवाल किया था कि यूपी में कब-कब कितने जिलों में धारा-144 लागू की गई है? इसके जवाब में शुक्रवार को विधान परिषद में एक डेटा पेश किया गया। इससे पता चला कि अप्रैल 2017 से अक्टूबर 2021 के बीच कोई भी ऐसा महीना नहीं रहा, जब यूपी में 50 से कम जिलों में धारा 144 लागू न रही हो।

यानी पिछले साढ़े चार साल में कोई भी महीना ऐसा नहीं गया है, जब यूपी की 60 फीसदी आबादी डर के साए में न रही हो। अगर उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हो चुका है फिर नागरिकों पर इतनी पाबंदी क्यों लगाई जा रही है?

सीएम योगी के तमाम धमकी भरे भड़ाऊ और अमर्यादित बयानों से इतर सच्चाई ये है कि उत्तर प्रदेश में हर तरह का अपराध अब भी हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जनता जितनी परेशान अपराधियों के कृत्यों से हैं, उससे कम परेशान सरकार की पाबंदियों से नहीं है।

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