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मंगलवार 8 जनवरी को लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पास हो गया। असम और नॉर्थ ईस्ट के कई दल इसका विरोध कर रहे थे।

सोमवार को इस विधेयक के विरोध में असम की एजीपी ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ दिया था, बावजूद इसके केंद्र सरकार ने इस विधेयक को पेश किया और पास कराया। विधेयक पारित होने पर बीजेपी प्रवक्ता मेहदी आलम बोरा ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।

हालांकि राज्यसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पास नहीं हो पाया है। लेकिन लोकसभा में पास होने के बाद अब त्रिपुरा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय में इसके खिलाफ पहले से चल रहे आंदोलन और तेज हो गए हैं।

8 जनवरी को कई संगठनों ने राज्यव्यापी बंद का भी आह्वान किया था। बंद के दौरान असम-अगरतला नैशनल हाइवे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने फायरिंग की। पुलिस फायरिंग में 6 प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं, इनमें से 3 की हालत गंभीर है।

असम के लोगों का कहना है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक लागू होने से असम के वास्तविक लोगों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा ‘यह बिल देश हित में है’

ख़ैर, नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ पूरे नॉर्थ इस्ट में प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन में राज्य के छात्र, डॉक्टर, वकील, शिक्षक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी… आदि हिस्सा ले रहे हैं।

लगातार चल रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार को ख़बर आयी कि पुलिस ने असमी साहित्यकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता डॉक्टर हिरेन गोहेन के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तरा कर लिया है।

प्रोफेसर हिरेन गोहेन के अलावा वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंत और कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) नेता अखिल गोगोई के खिलाफ भी राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तरा कर लिया गया है।

दिल्ली से भी प्रोफेसर हिरेन गोहेन और अखिल गोगोई की गिरफ्तारी के विरोध में आवाज बुलंद होने लगी हैं। स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा है कि अगर प्रो. हिरेन गोहेन और अखिल गोगोई राष्ट्रद्रोही हैं, तो मैं भी राष्ट्रद्रोही हूं।

योगेंद्र यादव ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है ‘नागरिकता बिल में संशोधन न सिर्फ असम समझौते का उल्लंघन है, यह भारत के मूल विचार के भी विपरीत है। धर्म के नाम पर नागरिकता? और हमारी संसद में ऐसा संशोधन पारित भी हो गया?

उस पर प्रो हिरेन गोहैन और अखिल गोगोई के विरोध को राष्ट्रद्रोह करार कर दिया गया? अगर यह राष्ट्रद्रोही हैं, तो मैं भी राष्ट्र द्रोही हूँ। मुझे भी गिरफ्तार किया जाए। इनके साथ जेल जाना मैं अपना गौरव समझूंगा।’

गिरफ्तार होने से पहले केएमएसएस नेता अखिल गोगोई ने मीडिया से कहा था कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक मनकारी और सांप्रदायिक है। अगर यह लागू होता है तो कम से कम 19 करोड़ बांग्लादेशी असम में घुस जाएंगे। इससे असम के वास्तविक लोगों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।’’

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