इस बार देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, आरएसएस प्रचारक नानाजी देशमुख, कलाकार भूपेन हजारिका को मिला। इसके साथ ही पुरस्कार को लेकर बधाई और सवालों का सिलसिला शुरू हो गया।
सवाल उठने लगा कि दलितों, पिछड़ों और वंचितों के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा देने वाले लोहिया, कांशीराम और कर्पूरी ठाकुर जैसे महापुरुषों को भारत रत्न क्यों नहीं दिया जाता है ?
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने बहुजन समाज के नायक मान्यवर कांशीराम के लिए भारत रत्न उपाधि की मांग की है।
सुधीन्द्र सोशल मीडिया पर लिखते हैं- ‘भाजपा सरकार ने मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न की उपाधि न देकर हमेशा की तरह दलितों और पिछड़ों की आवेहलना व उपेक्षा की है।’
ठीक इसी तरह तेजस्वी यादव भी ट्वीट करते हैं- ‘भारत रत्न पुरस्कार विजेताओं को बधाई। श्री राम मनोहर लोहिया जननायक कर्पूरी ठाकुर मान्यवर कांशीराम जी को भारत रत्न अवश्य ही मिलना चाहिए। वंचित, उपेक्षित समाज के उत्थान में उनके योगदान को कोई नहीं नकार सकता। किसी महापुरुष की विचारधारा, धर्म, जाति और वर्ग इसमें आड़े नहीं आना चाहिए।’
तेजस्वी यादव का ये ट्वीट ना सिर्फ बहुजन नायकों के लिए भारत रत्न की मांग करता है बल्कि एक नई बहस छेड़ देता है कि क्या धर्म या जाति की वजह से भी कोई भेदभाव होता है!

इसी बहस को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं-संविधान निर्माताओं ने सोचा था कि सबको मिलाकर एक सुंदर महान देश बनाएँगे। ब्राह्मणों ने आधा देश (48%) अपने पास रख लिया और बाक़ी मुख्य रूप से सवर्णों में बाँट दिया।’

दरअसल इस आरोप के पक्ष में दिलीप मंडल एक लिस्ट शेयर करते हैं- जिसके मुताबिक, 1954 से अभी तक दिए गए 48 भारत रत्न में से 23 भारत रत्न ऐसी विभूतियों को मिला है जो ब्राह्मण समुदाय से रहे हैं।

इसमें गौर करने लायक है कि अभी तक सिर्फ एक ओबीसी को और एक या दो दलित को ही भारत रत्न मिला है। देश का ये सर्वोच्च नागरिक सम्मान एक भी आदिवासी को नहीं मिला है।

भारत रत्न पाने वालों की जातिवार लिस्ट की कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन वरिष्ठ पत्रकार का ये दावा इस बहस के साथ बड़े सवाल खड़ा करता है।

क्या देश के सर्वोच्च पुरस्कार कहे जाने वाले भारत रत्न को देने में जाति को वरीयता दी जाती है ?

क्या सर्वोच्च पुरस्कार उन नायकों को देने में परहेज किया जाता है जो इस देश की बहुजन आबादी के हितों की बात करते हैं ?

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