ठीक एक साल पहले देश की राजधानी दिल्ली के कई इलाके सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस रहे थे। कई घर जल रहे थे, कई बेकसूर मारे जा रहे थे। ये दंगे बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिए एक भड़काऊ बयान के बाद शुरु हुए थे।

मिश्रा ने 22 फरवरी 2020 को डीसीपी की मौजूदगी में कहा था, “ट्रंप के जाने तक तो हम शांति से जा रहे हैं, लेकिन उसके बाद हम आपकी (पुलिस) भी नहीं सुनेंगे, अगर रास्ते ख़ाली नहीं हुए तो। ट्रंप के जाने तक आप (पुलिस) जाफ़राबाद और चांदबाग़ ख़ाली करवा लीजिए, ऐसी आपसे विनती है, वरना उसके बाद हमें रोड पर आना पड़ेगा”।

कपिल मिश्रा के इसी बयान के एक दिन बाद पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। मिश्रा ने जिस जगह खड़े होकर ये बयान दिया था, वहां सबसे ज़्यादा हिंसा देखने को मिली थी। दंगों को लेकर कपिल मिश्रा पर आरोप लगे कि उनके भड़काऊ बयान की वजह से ही हिंसा भड़की।

दंगों पर आधारित दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की एक रिपोर्ट में बीजेपी नेता को हिंसा का आरोपी बनाया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि हिंसा मिश्रा के भाषण के बाद ही शुरू हुई थी। हालांकि दिल्ली पुलिस ने बीजेपी नेता को दंगों का आरोपी नहीं बनाया।

कल इन दंगों की बरसी थी, ऐसे मौक़े पर उन लोगों को याद किया जा रहा है, जिन्होंने दंगों में अपना घर-परिवार सब कुछ खो दिया। उस अनाथ मासूम को भी याद किया जा रहा है, जो अपने पिता की लाश के करीब बैठा रो रहा था।

लेकिन मीडिया बरसी के इस मौके पर पीड़ितों को न याद कर दंगों के आरोपी कपिल मिश्रा को याद कर रहा है।

पीड़ितों से उनके दुख जानने और बांटने के बजाए मीडिया अपने भड़काऊ भाषण से दिल्ली को जलाने वाले बीजेपी नेता का इंटरव्यू लेता नज़र आ रहा है।

हैरानी की बात तो ये है कि बीबीसी और द वायर जैसी प्रतिष्ठित न्यूज़ वेबसाइट्स भी ऐसा ही कर रही हैं। वह दंगों पर दंगे को भड़काने वाले कपिल मिश्रा का पक्ष दिखाने की कोशिश कर रही हैं।

इससे भी हैरानी की बात तो ये है कि इंटरव्यू में कपिल मिश्रा को ये कहने का मौका दिया जा रहा है कि उन्हें अपने उस बयान पर कोई अफसोस नहीं है जिससे दिल्ली में दंगे भड़के। वह डंके की चोट पर कह रहे हैं कि अगर आगे भी इसकी ज़रूरत पड़ी तो वह इसे दोहराएंगे।

कई मीडिया संस्थानों द्वारा लिए गए कपिल मिश्रा के इंटरव्यू पर कई पत्रकारों ने ऐतराज़ जताया है। पत्रकार विनोद कापड़ी ने ट्वीट कर लिखा, “ये पहली बार देखा कि 50 से ज़्यादा की जान लेने वाले दंगों की बरसी पर दंगे भड़काने वाले सबसे बड़े दंगाई का इंटरव्यू लिया जा रहा है”।

वहीं पत्रकार साक्षी जोशी ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट कर लिखा, “इसके तो इंटरव्यू भी भड़काऊ की श्रेणी में आ रहे हैं। एक साल बाद ये वही बात बोलना, बुलवाना और उसे दिखाने का क्या मतलब है, बीबीसी तक इसमें शामिल हो रहा है”।

By: Asif Raza

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