Uttarakhand
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उत्तराखंड के जंगलों में पिछले कईं दिनों से भीषण आग लगी हुई है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें इसपर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहीं। शायद ऐसा इसलिए क्यूंकि जंगल की आग की गर्मी अभी उनके ए.सी. वाले मकानों तक नहीं पहुंची है। इन झुलसते हुए जंगलों में अब तक 46 आग की घटनाएं सामने आई हैं। TOI की ख़बर के मुताबिक़ 24 मई को पहली घटना दर्ज हुई थी और अब तक 51.34 हेक्टेयर का इलाका जल चुका है।

सोशल मीडिया पर आयी तस्वीरों में दावा किया जा रहा है कि ये आग उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों को प्रभावित कर रही है। हालाँकि, अधिकारीयों का दावा है कि सोशल मीडिया कुछ पुरानी तसवीरें भी शेयर हो रही हैं।

सोशल मीडिया यूजर अविनाश ने उत्तरखंड में लगी आग पर सरकार से सवाल करते हुए लिखा है कि, “उत्तराखंड के जंगलो में पिछले पाँच दिन से आग लगी हुई है। अब तक 46 आग की घटना दर्ज की जा चुकी है। 50 हेक्टेयर से ज़्यादा जंगल तबाह हो चुका है। जंगल में रहने वाले जीव और biodiversity को भारी नुक़सान हो रहा है।

यह उत्तराखंड में आग लगने की पहली घटना नहीं है। साल 2000 से अब तक क़रीब 44 हज़ार हेक्टेयर से ज़्यादा जंगल आग की भेंट चढ़ चुका है। लेकिन राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता। मीडिया को भी नहीं पड़ता। आम लोगों का भी पता नहीं! जलवायु संकट, स्थानीय लोगों की जीविका, वन जीवन इनकी किसको पड़ी है? फिर कोई कमिटी बनेगी, फंड अलॉट होंगे और फिर अगले साल आग लगने का इंतज़ार किया जाएगा!”

यूँ तो कहा जाता है कि उत्तराखंड ‘फारेस्ट फायर प्रोन’ राज्य है। लेकिन ये जानने के बाद भी सरकारें क्या कदम उठती हैं? केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार क्या कर रही है? केवल पैकेज घोषित करेंगे या कुछ ज़रूरी फैसले लेकर इन जंगलों में मर रहे पेड़-जीव और परेशान लोगों की मदद करेंगे।

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