29 नवंबर को आंकडें आए कि भारत की जीडीपी गिरकर 4.5 फीसदी पर आ गई है। मोदी सरकार के लिए ये आर्थिक मोर्चे पर सबसे बड़ा झटका था। मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर महीने में सकल घरलू उत्पाद यानी GDP ग्रोथ रेट घटकर 4.5 फीसदी हो गई है। हालांकि पिछली तिमाही में यही 5 फीसदी थी। इसके बावजूद मोदी सरकार कह रही है कि देश में सब कुछ अच्छा है।

जीडीपी की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर सभी लोगों ने इसकी जानकारी देनी शुरू कर दी। इसी कड़ी में आजतक के एंकर रोहित सरदाना ने भारत की गिरी हुई ‘जीडीपी’ की जानकारी देते हुए ट्वीट किया कि, “आर्थिक विकास दर गिरकर 4.5 % हुई। पिछली तिमाही में 5% थी विकास दर।”

रोहित सरदाना के इतना लिखते ही लोगों ने उन्हें बताना शुरू कर दिया कि, आपके लिए हिन्दू-मुस्लिम, सेक्युलर- सेक्युलर करके देश के अंदर जहर और नफ़रत फैलाओ ये सब आपके मुँह से अच्छा नहीं लगता।

वहीं ट्वीटर पर एक यूजर रॉफल सिन्हा ने रोहित सरदाना को जवाब देते हुए लिखा है कि, “अभी खबर मत दो, जब तुमसे ज्यादा गिर जाए तो बताना।”

सुब्रमण्यम स्वामी का खुलासा : GDP का 4.8% भी झूठा आंकड़ा है, असल में 1.5% हो गई है GDP

दरअसल रोहित सरदाना देश के उन पत्रकारों में शामिल हैं जिन्हें हिन्दू-मुस्लिम, मदिर-मस्जिद, विपक्ष पर वार, विपक्षी नेताओं की छवि धूमिल करना, पाकिस्तान-कश्मीर, ओवैसी, राहुल गांधी, मोदी सरकार की अपने शो ‘दंगल’ के जरिए तारीफ करना सबसे ज्यादा पसंद है।

मगर रोहित सरदाना को अपने शो में जो नहीं पसंद है, वो है मोदी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना-समीक्षा करना, बीजेपी पर कोई कटाक्ष करना, मुद्दों पर नहीं बात करना, किसान-मजदूर, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, महंगाई जैसे मुद्दों पर सरदाना को ज़रा भी बात करना पसंद नहीं है। इसीलिए जब रोहित सरदाना ने जीडीपी पर ट्वीट किया तो लोग उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगे।

फिर हो सकती है जज लोया की मौत की जांच, दिग्विजय सिंह ने की केस में SIT गठन की मांग

बता दें कि, वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में भारत की ग्रोथ रेट 8 फीसदी, दूसरी तिमाही में 7 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.8 फीसदी पर थी। वहीं वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही में जीडीपी गिरकर 5 फीसदी पर आ गई थी। अब जीडीपी ग्रोथ 4.5 फीसदी पर आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरु हो गया है।