मोदी सरकार ने जिस तेजी से बिना राय-मशविरा करे अन्नदाता किसानों के लिए तीन कानून बनाए उसी कानून के खिलाफ आज किसान सड़कों पर उतर चुके हैं।

इस कानून के खिलाफ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के किसान दिल्ली में दस्तक देने वाले हैं। हरियाणा में भाजपा की खट्टर सरकार किसानों पर हर जुल्म करने पर उतारू हो चुकी है

इसके लिए पुलिस उनपर भयंकर ठंढ में वाटर कैनन से पानी की बौछार की जा रही है। मानों सरकार किसानों के इस आंदोलन को कुचल देना चाहती है!

किसानों के प्रति जो रवैया मोदी और भाजपा सरकारों का है वही रवैया ‘मीडिया’ का भी है। गोदी मीडिया मोदी सरकार के बचाव में मैदान में उतर चुकी है।

इसीलिए मीडिया अब किसानों के इस संवैधानिक आंदोलन को ‘खालिस्तानी आतंकी’ से जोड़कर देश के सामने अन्नदाता को ही बदनाम करने में जुट गया है।

जब से भाजपा की सरकार आयी है तब से एक चीज गौर करने वाली है कि सरकार की नीतियों से पीड़ित होकर कोई भी वर्ग सड़क पर निकलता है, मसलन आंदोलन करें तो भाजपा सरकार और उसका मीडिया उस आंदोलन का कोई न कोई आतंकी, नक्सली, पाकिस्तानी, खालिस्तानी कनेक्शन का प्रोपेगैंडा निकाल ही लेता है।

ताकि आंदोलन को बदनाम करके आसानी से उसका दमन किया जा सके। यही काम टीवी9 भारतवर्ष ने भी किया है। टीवी9 ने बाकायदा, “पंजाब-हरियाणा के किसानों को खालिस्तान ने मोहरा बनाया” नाम से पूरा प्रोग्राम चलाया हैं।

मीडिया का सरकार की हां में हां मिलाना कितना खतरनाक है आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि, देश के लोग भी एक दूसरे को देशद्रोही,नक्सली, पाकिस्तानी कहने लगे हैं। इसके लिए मोदी सरकार, भाजपा और मीडिया नैरेटिव गढ़ चुके हैं।

इससे भाजपा-मोड़ो सरकार को फायदा ये होता है कि, आम जनता उनपर कोई सवाल ही नहीं उठाती। इसके आड़ में ये लोग बेधड़क अजीबोगरीब फैसले लेते जा रहे हैं। किसी की कोई जवाबदेही नहीं है। ये स्वंतंत्र भारत मे पहली बार हो रहा है। मगर देश का किसान अपने हक़ के लिए स्वयं सड़क पर उतर चुका है।

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