पांच राज्यों के चुनाव में BJP की बुरी तरह से हार के बाद विपक्ष का आत्मविश्वास बढ़ा है। ये चुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी तो साबित हुई ही है मगर साथ ही विपक्ष के लिए भी ये जीत लाभकारी सिद्ध हुई है।

क्योंकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनाव में BJP के हारने के बाद उसके लिए आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव मुश्किल होने वाले हैं।

इसका सीधा असर अप्रैल में लोकसभा चुनाव में दिखेगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में BJP की पिछले पंद्रह साल से सरकार थी, येदोनों राज्य एक तरह से बीजेपी के गढ़ माने जाने लगे थे। जो अब उसके हाथ से जाने के बाद कांग्रेस की एक बार फिर से वापसी हुई और एक लम्बे अरसे बाद कांग्रेस ने जीत का स्वाद चखा है।

यानि कांग्रेस के साथ ही विपक्ष के लिए साल 2018 अच्छा साबित हुआ। राजदनेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आने वाले लोकसभा के चुनाव के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए ट्वीट किया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि,“2018 अच्छा साल था, 2019 अच्छा साल होगा।”

कहीं न कहीं BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं में हार की हताशा साफ़ देखने को मिल रही है। इसकी बानगी 15दिसम्बर को रायबरेली में हुई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली में देखने को मिली।

मोदी की रैली में न के बराबर भीड़ मौजूद थी, क्योंकि जिस तरह से पीएम मोदी की रैलियों में भीड़ दिखाई देती है उसके अपेक्षाकृत यहाँ नहीं दिखाई दी।

वहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बसपा गठबंधन होने के बाद BJP के लिए अपनी 73 लोकसभा सीट बचाना टेढ़ी खीर साबित हो नजर आ रहा है।

2014 चुनाव में जो वोट प्रतिशत सपा-बसपा को मिला था अगर उनको मिला दिया जाये तो वो बीजेपी को मिले प्रतिशत से कहीं ज्यादा है।

जबकि गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में हुए उप चुनाव में महागठबंधन बीजेपी को पहले ही मात दे चुका है। कुल मिलकर तेजस्वी का ट्वीट विपक्ष के लिए सकारात्मक है।

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