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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने सोमवार को फीस बढ़ोतरी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों की मांग है कि प्रशासन फीस बढ़ोतरी समेत कई अहम घोषणाओं को वापस लिया जाए।

छात्रों ने वाइस चांसलर के खिलाफ जेएनयू कैंपस के बाहर प्रदर्शन भी किया। विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा उन छात्रों पर पानी की बौछारें और लाठियां भी चलायी गयी । आज जेएनयू विश्वविद्यालय में तीसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया है।

बता दे की इस समारोह को संबोधित करने के लिए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक मौजूद थे। बता दे की छात्रों के प्रदर्शन को रोकने के लिए भारी संख्या में सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवान को तैनात किया और उन प्रदर्शनकारी छात्रों को खदेड़ने के लिए वाटर कैनन और लाठी चार्ज का भी इस्तेमाल किया गया।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग है कि हॉस्टल में कोई सर्विस चार्ज ना लिया जाए, ना ही हॉस्टल में कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया जाए। इसके अलावा छात्रों की मांग है कि हॉस्टल में आने-जाने के टाइम की पाबंदी को खत्म किया जाए।

यहां प्रदर्शन कर रहे एक छात्र का कहना है- ‘पिछले 15 दिनों से हम फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनयू में 40 फीसद छात्र गरीब परिवारों से आते हैं। ऐसे में कैसे हम शिक्षा ग्रहण कर पा रहे हैं।’

वहीं इस प्रदर्शन को लेकर जेएनयू छात्रों के संघर्ष को देश के कई नेताओं ने ट्वीट कर उनका समर्थन किया है। जहां राजद नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा- देश के सर्वोच्च विश्वविद्यालय JNU में हॉस्टल, मेस समेत फ़ीस की अप्रत्याशित बढ़ोतरी एवं नियमों के बदलाव के ख़िलाफ़ छात्रों की वाजिब माँगों पर पुलिस बल का प्रयोग निंदनीय है। BJP नहीं चाहती कि गाँव-ग़रीब के बच्चे JNU जैसी यूनिवर्सिटी में पढ़े। हम मज़बूती से छात्रों की माँगो के साथ है।

रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा- ‘JNU की फ़ीस में अप्रत्याशित वृद्धि व बंदिशों के विरुद्ध छात्रों के सत्याग्रह पर बल प्रयोग निंदनीय है। सरकार द्वारा फ़ीस बढ़ोतरी का निर्णय देश के भविष्य से खिलवाड़ है। JNU में पढ़ने वाले अधिकतर छात्र गरीब, शोषित, वंचित, दलित, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग से होते हैं’।

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