उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में पुलिस द्वारा मासूम के सामने पिता की पिटाई के मामले पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस यूपी पुलिस का गुंडों-बदमाशों पर ज़ोर नहीं चलता, वह ग़रीबों-निर्बलों को भेड़-बकरी की तरह पीट रही है।

स्वाति ने ट्वीट कर लिखा, “सारा ज़ोर गरीबों और निर्बल पर ही दिखाती है यूपी पुलिस? कभी सेंगर और चिन्मयानन्द के खिलाफ भी थोड़ी हिम्मत दिखा देते? बीच सड़क पर छोटे से बच्चे के हाथ जोड़ने के बाद भी पिता को पीटती रही पुलिस। गुंडों को सलाम ठोकते हो और जनता को भेड़ बकरी समझते हो! छी!”

बता दें कि ज़िले के सकारपारा इलाके में 10 सितंबर को मोटर वाहन अधिनियम के लागू होने के बाद हेलमेट न पहनने व गाड़ी के कागजात साथ न रखने पर एक युवक को दरोगा व सिपाही ने बीच रोड पर बेरहमी से पीटा था। इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें ये दिखा कि पुलिस जब युवक को बेरहमी से पीट रही थी तो उसका मासूम बेटा वहीं मौजूद था।

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दरोगा मासूम के सामने युवक के कंधे पर बैठ गया और उसके पैरों को बूटों से दबाने लगा। युवक छोड़ देने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन पुलिस वालों का दिल नहीं पसीजा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो एसपी ने आरोपी दरोगा और सिपाही को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं।

लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि पुलिस वालों के ख़िलाफ़ इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऐसे बरबर्ता के मामलों में सिर्फ नौकरी से निलंबित किया जाना काफी है? क्या ये कार्रवाई एक तरह से आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने का तरीका नहीं है? क्या ये कार्रवाई इस तरह की घटनाओं को रोकने में कामयाब होंगी?

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