चुनाव आयुक्त लवासा चाहते थे कि आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामलों के असहमति पत्र सार्वजनिक किए जाएं। मगर इसके बाद बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अल्पमत विचार केवल रिकॉर्ड का हिस्सा होंगे, उसे आदेश में शामिल नहीं किया जाएगा। जिसपर अब कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर लिखा यह संवैधानिक उपहास का विषय है। चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में ‘काले राज’ की नई परिपाटी शुरू करना चाहता है। उन्होंने पूछा कि अगर चुनाव आयोग अपने कामकाज में निष्पक्ष नहीं हो सकता तो वह कैसे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कैसे सुनिश्चित करेगा ?

दरअसल मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र ने माना कि आदर्श आचार संहिता से जुड़े मामले पूरी तरह से न्यायिक कार्यवाही नहीं हैं इसलिए इनमें असहमति या अल्पमत को अंतिम आदेश में शामिल नहीं किया जाएगा। केवल बहुमत का मत ही आदेश में प्रकाशित होगा।

गौरतलब हो कि चुनाव आयोग द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में क्लिन चीट दिए जाने पर लावासा ने कई मौकों पर असहमति जताई थी।

जिसके बाद अशोक लवासा ने आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में क्लीन चिट दिए जाने के मामले को आयोग अहम फैसला लिया था। जिसमें उनकी असहमति रिकॉर्ड करने के आग्रह को मानने से इनकार कर दिया है।

बता दें कि बीते मंगलवार को पोल पैनल ने लावास की मांग को बहुमत के साथ खारिज कर दिया गया था। पैनल में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और दो अन्य सदस्य लवासा और सुशील चंद्रा शामिल हैं।

विवादास्पद मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया, जिसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि असहमति नोट और अल्पसंख्यक विचार रिकॉर्ड का हिस्सा रहेंगे लेकिन इसके आदेशों का हिस्सा नहीं होगा।