कोरोना को लेकर तब्लीग़ी जमात के लोगों को बदनाम करना मीडिया को भारी पड़ता नज़र आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने केंद्र और PCI से दो हफ्ते के अंदर ये बताने को कहा है कि उन्होंने इस संबंध में क्या कार्रवाई की।

दरअसल जमीयत-उलेमा-हिंद ने निजामुद्दीन मरकज़ मामले की मीडिया कवरेज पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि संकट के समय में मीडिया नफ़रत फैलाने का काम कर रहा है। याचिका में कोर्ट में अपील की गई है कि नफ़रत फैलने के उद्देश्य से झूठी खबर चलाने वाले चैनलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए।

जमीयत की इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और PCI से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि लोगों को कानून और व्यवस्था के मुद्दों को भड़काने न दें। ये ऐसी बातें हैं जो बाद में कानून-व्‍यवस्‍था का मुद्दा बन जाती हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों द्वारा केबल टीवी (विनियमन) अधिनियम के कथित उल्लंघन पर भी विशिष्ट जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

बता दें कि पिछली सुनवाई में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के तेवर अलग थे। सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश (CJI) ने कहा था कि हम प्रेस पर पाबंदी नहीं लगा सकते। याचिका दाखिल करने वाले जमीयत-उलेमा-हिंद के वकील एजाज़ मकबूल ने तब मीडिया पर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाया था। जिसपर CJI ने कहा था कि आप प्रेस काउंसिल को पक्ष बनाइए।

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